कंचन चंदर: संक्षिप्त परिचय
कंचन चंदर का जन्म 1957 में दिल्ली में हुआ था। उन्होंने कला की शिक्षा शांतिनिकेतन, दिल्ली और जर्मनी से प्राप्त की। उनकी कला में महिला पहचान, मातृत्व और व्यक्तिगत अनुभवों का गहरा चित्रण मिलता है। 17 जून 2024 को उनका निधन हो गया।
कंचन चंदर (Kanchan Chander) भारतीय समकालीन कला जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उन्होंने अपनी कला शिक्षा दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट से पूरी की और बाद में लंदन तथा बर्लिन में उच्च शिक्षा प्राप्त की।
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| कंचन चंदर |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
कंचन चंदर ने 1970 के दशक के उत्तरार्ध में कला की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट से पेंटिंग और प्रिंटमेकिंग में विशेषज्ञता हासिल की। उनकी कलात्मक दृष्टि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तब पहचान मिली जब उन्होंने बर्लिन (जर्मनी) में ग्राफिक आर्ट्स का अध्ययन किया।
कलात्मक शैली और विषय
उनकी कला मुख्य रूप से नारी शक्ति, मातृत्व और स्त्री देह के इर्द-गिर्द घूमती है। वे अपनी पेंटिंग्स में अक्सर लोक कला (Folk Art) और आदिवासी कला के तत्वों का समावेश करती हैं। उनकी कृतियों में बोल्ड रंगों और जटिल बनावट (Textures) का प्रयोग स्पष्ट दिखाई देता है।
- प्रमुख विषय: उन्होंने 'धड़' (Torso) श्रृंखला और 'देवी' रूपों पर व्यापक काम किया है।
- माध्यम: वे मुख्य रूप से मिक्स मीडिया, लिथोग्राफी और एचिंग (Etching) का उपयोग करती हैं।
करियर और उपलब्धियाँ
कंचन चंदर ने कई दशकों तक कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली में अध्यापन का कार्य भी किया। उनकी कला प्रदर्शनियां भारत के साथ-साथ लंदन, बर्लिन, पेरिस और न्यूयॉर्क जैसे शहरों में आयोजित की जा चुकी हैं।
मुख्य बिंदु:
- जन्म: 1957, दिल्ली।
- शिक्षा: दिल्ली, लंदन और बर्लिन।
- विशेषता: नारीवादी कला और लोक तत्वों का मेल।
- पुरस्कार: उन्हें ब्रिटिश काउंसिल और भारत सरकार द्वारा कई छात्रवृत्तियां और सम्मान प्राप्त हुए हैं।
उनकी कला जीवन के उतार-चढ़ाव और स्त्री के भीतर की अदम्य शक्ति को दर्शाती है, जो उन्हें समकालीन भारतीय कलाकारों की श्रेणी में अग्रणी बनाती है।
चित्रकला की मुख्य विशेषताएं
- नारीवादी दृष्टिकोण: उन्होंने अपनी कला में महिला शरीर और उसके अनुभवों को मुख्य विषय बनाया।
- मिश्रित माध्यम: वे कैनवास पर कोलाज, प्रिंटमेकिंग और एक्रिलिक के साथ-साथ कपड़े और सेक्विन (सितारों) का प्रयोग करती थीं।
- देवी और नारी: उनकी 'टॉर्सो' (धड़) श्रृंखला बहुत प्रसिद्ध है, जिसमें वे नारी को देवी के रूप में चित्रित करती थीं।
- लोक कला का प्रभाव: उनकी कृतियों पर आदिवासी और लोक कला की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।
टीजीटी/पीजीटी/यूजीसी नेट हेतु महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
1. कंचन चंदर मुख्य रूप से किस विधा के लिए जानी जाती हैं?
(A) केवल मूर्तिकला
(B) चित्रकला और प्रिंटमेकिंग
(C) वास्तुकला
(D) छायांकन (Photography)
उत्तर: (B) चित्रकला और प्रिंटमेकिंग
2. कंचन चंदर की प्रसिद्ध कला श्रृंखला 'टॉर्सो' (Torso) किस विषय पर आधारित है?
(A) प्रकृति चित्रण
(B) महिला धड़ और देवी स्वरूप
(C) युद्ध के दृश्य
(D) ऐतिहासिक इमारतें
उत्तर: (B) महिला धड़ और देवी स्वरूप
3. कंचन चंदर ने अपनी कला शिक्षा कहाँ से प्राप्त की?
(A) जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स
(B) कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली और शांतिनिकेतन
(C) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
(D) मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट
उत्तर: (B) कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली और शांतिनिकेतन
4. कंचन चंदर अपनी कलाकृतियों में किन सजावटी वस्तुओं का प्रयोग करती थीं?
(A) मिट्टी और पत्थर
(B) सेक्विन, मोती और कपड़े के टुकड़े
(C) केवल तेल रंग
(D) लोहे की छड़ें
उत्तर: (B) सेक्विन, मोती और कपड़े के टुकड़े
5. कंचन चंदर का निधन कब हुआ?
(A) 2010
(B) 2015
(C) 2024
(D) 2020
उत्तर: (C) 2024
6. 'रेवोल्यूशनरी माइंड्स' और 'वुमन इन आर्ट' जैसे विषयों पर काम करने वाली कलाकार कौन हैं?
(A) अमृता शेरगिल
(B) कंचन चंदर
(C) अर्पिता सिंह
(D) अंजली इला मेनन
उत्तर: (B) कंचन चंदर
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