- मालिक की जांच: अब सब-रजिस्ट्रार सिर्फ कागज़ जमा करने वाला बाबू नहीं रहेगा, बल्कि वह जांच करेगा कि बेचने वाले के पास ज़मीन का असली मालिकाना हक (Title) है या नहीं।
- रजिस्ट्री रोकने का हक: अगर कागज़ात में कोई गड़बड़ी या फर्जीवाड़ा लगा, तो रजिस्ट्रार तुरंत रजिस्ट्री को रोक (Refuse) सकता है।
- रजिस्ट्री रद्द करने की शक्ति: अगर कोई गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री करा भी लेता है, तो जांच के बाद उसे निरस्त करने का अधिकार भी सब-रजिस्ट्रार के पास होगा।
- मुकदमों की तुरंत जांच: पहले लोग तहसील में चल रहे ज़मीन के मुकदमों (Court Stay या विवाद) को छुपाकर ज़मीन बेच देते थे।
- ऑनलाइन वेरिफिकेशन: अब नया सिस्टम लागू होने से सब-रजिस्ट्रार अपने कंप्यूटर पर एक क्लिक करके तुरंत देख सकेगा कि उस ज़मीन पर तहसील या किसी कोर्ट का स्टे (Stay Order) तो नहीं है, या ज़मीन किसी बैंक में बंधक (Mortgage) तो नहीं रखी गई है। जब तक वहां से 'ग्रीन सिग्नल' नहीं मिलेगा, रजिस्ट्री आगे नहीं बढ़ेगी।
- नवीनतम खतौनी (UP Bhulekh): एकदम नई खतौनी की कॉपी, जिसमें बेचने वाले का नाम साफ दर्ज हो।
- स्वामित्व की पूरी श्रृंखला (Chain of Title): बेचने वाले के पास यह ज़मीन कहाँ से आई? (पुराना बैनामा, दानपत्र, या वसीयत) उसकी पूरी कड़ी के कागज़।
- आधार कार्ड और बायोमेट्रिक: खरीदार, विक्रेता और दोनों गवाहों का आधार कार्ड और मौके पर फिंगरप्रिंट/आईरिस (अंगूठा या आंख) से बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन।
- पैन कार्ड (PAN Card): पैसों के लेन-देन में पारदर्शिता के लिए।
- नो-ऑब्जेक्शन या कोर्ट स्टेटस रिपोर्ट: ज़मीन पर कोई कानूनी विवाद न होने का प्रमाण।
- पहले का नियम: परिवार के सदस्यों (जैसे बेटा, बेटी, पत्नी, भाई आदि) को ज़मीन दान करने पर सरकार ने एकमुश्त ₹5,000 का स्टाम्प शुल्क तय किया था।
- अब क्या बदलाव हो रहा है?: अब भले ही आपको छूट के तहत पूरा भारी-भरकम स्टाम्प शुल्क न देना पड़े, लेकिन ज़मीन की कुल मालियत (Circle Rate/मार्केट वैल्यू) का कम से कम 1% शुल्क देना पड़ सकता है। इससे जो लोग बहुत कम खर्चे में बड़ी-बड़ी संपत्तियों का हेर-फेर कर लेते थे, उस पर लगाम लगेगी और सरकार का प्रोसेसिंग चार्ज भी सही से तय होगा।
- ऑनलाइन स्लॉट और डॉक्यूमेंट अपलोड: सबसे पहले आपको यूपी स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन की वेबसाइट पर जाकर सारे कागज़ात अपलोड करने होंगे और रजिस्ट्री का समय (Slot) बुक करना होगा।
- बैकएंड ऑनलाइन जांच: सब-रजिस्ट्रार ऑफिस का सिस्टम अपने आप भुलेख (Bhulekh) और तहसील के मुकदमों के डेटा से आपके कागज़ात का मिलान करेगा।
- बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: दिए गए समय पर सब-रजिस्ट्रार दफ्तर जाकर खरीदार, विक्रेता और गवाहों का बायोमेट्रिक (अंगूठे का निशान) लिया जाएगा।
- अंतिम अप्रूवल: जब सब-रजिस्ट्रार संतुष्ट हो जाएगा कि ज़मीन का मालिकाना हक सही है, कोई कोर्ट स्टे नहीं है और बायोमेट्रिक मैच हो गया है, तभी रजिस्ट्री को डिजिटल अप्रूवल मिलेगा।
उत्तर प्रदेश में अब ज़मीन या मकान खरीदना और बेचना पहले जैसा आसान नहीं रहा, पर सच कहूँ तो ये आम जनता के लिए बहुत बड़े फायदे की बात है!
मैंने हाल ही में अपनी संपत्ति के कागजात के सिलसिले में थोड़ी भाग-दौड़ की, तो पता चला कि यूपी सरकार हमारे पुराने रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 में बहुत बड़ा बदलाव करने जा रही है। पहले क्या होता था कि कोई भी फर्जी कागज़ बना कर किसी की भी ज़मीन बेच देता था और बाद में असली मालिक सालों-साल कचहरी के चक्कर काटता रहता था। पर अब इन सब फर्जीवाड़ों पर पूरी तरह से ब्रेक लगने वाला है।
यदि आप भी ज़मीन या मकान खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको यह आसान भाषा में समझना बहुत ज़रूरी है कि अब रजिस्ट्री का नया तरीका क्या होगा और आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना पड़ेगा:
रजिस्ट्रेशन एक्ट (1908) में संशोधन: सब-रजिस्ट्रार की शक्तियों में क्या बदलाव आया?
पहले सब-रजिस्ट्रार का काम सिर्फ इतना होता था कि स्टाम्प ड्यूटी जमा हुई है या नहीं, और खरीदार-बेचने वाला सामने खड़े हैं या नहीं—बस इतना देखकर दस्तखत कर देते थे। उनको यह जांचने का कानूनी अधिकार ही नहीं था कि बेचने वाला असली मालिक है भी या नहीं!
अब क्या बदलेगा?
तहसील और रजिस्ट्रार ऑफिस का ऑनलाइन जुड़ाव: कोर्ट स्टे और मुकदमों की ऐसे होगी जांच
हाँ, बिल्कुल! अब तहसील प्रशासन और रजिस्ट्रार ऑफिस का डेटा आपस में ऑनलाइन पूरी तरह लिंक रहेगा।
ज़मीन या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के लिए ज़रूरी डॉक्युमेंट्स की सूची
अब सिर्फ एक बैनामा (Sale Deed) ड्राफ्ट करवा लेने से काम नहीं चलेगा। अब आपको यह पूरे कागज़ात तैयार रखने होंगे:
स्टाम्प शुल्क और दानपत्र (Gift Deed) के नियमों में नया बदलाव
सामान्य ज़मीन की खरीद-बिक्री पर यूपी में नियमानुसार 5% से 7% तक स्टाम्प शुल्क (महिला/पुरुष के आधार पर) और 1% रजिस्ट्रेशन फीस लगती है।
(H3) क्या अब उत्तराधिकार और दानपत्र में लगेगा 1% शुल्क?
रक्त संबंधी (Blood Relation/उत्तराधिकारी) को ज़मीन दान (Gift Deed) करने के नियम में एक बड़ा अपडेट है:
ऑनलाइन वेरिफिकेशन से लेकर फाइनल अप्रूवल तक: रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया
निष्कर्ष: आम जनता की संपत्ति और गाढ़ी कमाई के लिए सुरक्षित कदम
थोड़ा समय कागज़ात की जांच में ज़रूर लग सकता है, लेकिन यह नया नियम हम जैसे आम लोगों की गाढ़ी कमाई को डूबने से बचाएगा। अब कोई भू-माफिया फर्जी कागज़ बनाकर आपकी ज़मीन नहीं हड़प पाएगा। इसलिए जब भी ज़मीन खरीदें, अपने सारे कागज़ात पहले से दुरुस्त रखें!

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