कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन, NEET पेपर लीक और शिक्षा माफिया पर नकेल की मांग

काकरोच जनता पार्टी का आंदोलन और राजनीतिक महत्वकांक्षाएं

 काकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने 34 दिनों के धरना प्रदर्शन के बाद विजय हासिल कर ली सरकार झुक गई उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का  इस्तीफ़ा था ,जो पूरा हो गया ये आंदोलन सफल रहा या असफल ये नहीं कहा जा सकता ,इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य सरकार पर दबाव समूह के रूप में काम करना जैसे अन्ना हजारे की मदद से केजरीवाल  मीडिया में छा गए थे देश ने उनकी भविष्य का ईमानदार  बंदा माना था कि देश भर में भ्रष्टाचार समाप्त कर देगा ,उस समय तेजी से घोटाले हो रहे थे जनता को लगा ये तारणहार है लोगो ने उसे दिल्ली में बैठाए पर वह सत्ता पाते ही अराजकता वादी हो गया ,भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर खुद शराब घोटाला करने लगा ,जनता को निराशा हुई और उसे तख्त से हटा दिया ,अब जब केजरीवाल कमजोर हुए तो उन्हीं के पार्टी में 2020 से 2023 तक उनका सोशल मीडिया हैंडल करने वाला युवक ने ये अवसर समझा खुद को नया केजरीवाल के रूप में   देश में स्थापित करने के लिए सही समय चुना जब देश ने NEET एग्जाम के पेपर आउट होने पर देश भर में रोष था क्योंकि देश के हर जिले में इससे प्रभावित परिवार थे ,इस मामले में मीडिया में लगातार न्यूज चली की कैसे पेपर आउट हुआ कैसे कोचिंग माफिया ने पेपर को जयपुर से देश भर के वाट्सअप ग्रुप में प्रसारित किया। अब मौका देखा अभिजीत दीपके ने ,कूद पड़ा लाभ लेने के लिए, उसे ये जानकारी भी थी कि संसद का वर्षा कालीन सत्र प्रारंभ होगा सरकार झुकेगी ,और वह यदि जीत गया तो देश भर में उसके संघर्ष की वह वही होगी और बिना पच्चीस साल के संघर्ष के वह सीधे चुनाव लड़ कर  सांसद विधायक बनेगा फिर एक नई पार्टी बनाकर राजनीति में सीधे उतरेगा।

NEET परीक्षा में सुधार और शिक्षा माफिया के विरोध में जंतर मंतर पर बैनर थामे प्रदर्शन करते भारतीय छात्र


आंदोलन में शामिल चेहरे और राजनीतिक अवसरवादिता

 इस आंदोलन में NEET की तैयारी करने वाले छात्र तो इक्का दुक्का थे पर जो मोदी के धुर विरोधी ग्रुप थे जो पिछले वर्ष साल से मोदी को पानी पीकर गाली देते थे वह थे क्योंकि मैने देखा जितने इस आंदोलन में सपोर्ट के लिए आए वह पिछले दस साल से मोदी विरोध में सोशल मीडिया में गाली देते हैं या वीडियो बना रहे जैसे  नसरुद्दीन शाह का जला भुना चेहरा सोशल मीडिया में आया कि मोदी अनपढ़ है कैसे छात्रों पर लाठियां चलवा दीं,ये नसीरुद्दीन भारत में फिल्में बनाता है भारत के लोगों से खाता है ब्राम्हण लड़की पाठक से शादी करता है और इसे हिंदुओं से डर लगता है,एक सोनाक्षी सिन्हा जो एक मोहम्मडन से शादी करके इतना खुश  नहीं दिखाई दी जितनी खुशी से सोशल मीडिया में नाची जितना धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद, इनको इस बात की चिंता नहीं की कि बच्चे कैसे डॉक्टर बने इंजीनियर बने पर मोदी की हार में खुशी मिलती है क्योंकि इनके पति भी चाहते हैं कि भारत में हिंदू एक न बचे , भाजपा , RSS खत्म हो जाए। अखिलेश ,राहुल,डिंपल ,आदि जितनी भी नेता काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में गए कुछ देर रुके वह उनकी दिलासा इसलिए नहीं दिला रहे थे कि वह छात्रों के साथ है वह वास्तव में खफा थे कि जिस आंदोलन को राहुल गांधी को करना था उसको काकरोच अभिजीत दीपके और  सोनम वांगचुक ने पूरे देश में  फैला कर इन कांग्रेसी ,सपाई नेताओं का कद कम कर दिया राहुल गांधी ने सोचा क्या करे इस आंदोलन में तो आम आदमी पार्टी का केजरीवाल घुसा है उसके साथ यदि आंदोलन के समर्थन में कूदे तो केजरीवाल से कमतर आंके जाएंगे इसलिए वह सीधे प्रधानमंत्री आवास के पीछे जाकर  धरना देने लगे पर मीडिया ने कोई भाव नहीं दिया क्योंकि यूथ इन नेताओं को चुटिया टाइप अवसर वादी  मान रहे थे क्योंकि कांग्रेस पार्टी 2004 से2014 तक थी पर छात्रों के हितों में कोई काम नहीं किया था पेपर तब भी आउट हुए पर कोई कानून नहीं बना ,अब मगरमच्छ के घड़ियाली आंसू बहा रहे ,छात्रों के शुभचिंतक दिख रहे।

विदेशी फंडिंग, बांग्लादेश-नेपाल मॉडल और सत्ता गिराने की साजिश?

​क्या यह आंदोलन विदेशी फंडिंग से था? क्योंकि कोई भी चाहे कितने  बोट्स लगा दो, कुछ भी लगा दो, एक दिन में किसी व्यक्ति के दो करोड़ फॉलोवर नहीं हो सकते और यदि आप दो करोड़ फॉलोवर करोगे तो कई करोड़ रुपए बर्बाद भी किए होगे।क्या ये आशंका व्यक्त करना सही नहीं होगा कि जब काकरोच जनता पार्टी नामक पेज इंस्टाग्राम और फेसबुक में बने तो पहले दिन जब करोड़ों में इस पेज को फॉलो करने वाले व्यक्ति की पहचान उनका देश पाकिस्तान और बांग्लादेश क्यों था ,जबकि पाकिस्तान का NEET परीक्षा पेपर लीक प्रकरण से क्या मतलब था ,इसके दो अर्थ निकलते हैं कि अभिजीत दीपके के कॉन्टैक्ट पहले से पाकिस्तान बांग्लादेश से हैं या फिर वह पाकिस्तान बांग्लादेश के विभिन्न फेसबुक ,इंस्टाग्राम चलाने वाले बंदों के ग्रुप को फॉलो करते हैं। भारत सरकार को संवेदन शील होकर इस मामले की छान बीन करनी चाहिए कि आखिर अभिजीत दीपके के फॉलोवर बांग्लादेशी,पाकिस्तानी कैसे हुए।देश की एकता अखंडता के लिए ये जानना आवश्यक है कि क्या इस तरह के आंदोलन पाकिस्तान अपने ISI के जरिए खड़ा कर रहा है जिससे  देश में नेपाल और बांग्लादेश श्रीलंका की तरह अराजकता फैलाया जा सके क्या अभिजीत दीपके ISI के प्यादे हो सकते हैं,ये आशंका है सच्चाई नहीं ,सच्चाई भारतीय गुप्तचर एजेंसियों को पता करना चाहिए।

        प्लस जो गाली देने वाली लड़कियां थी बाकायदा उनकी फंडिंग की होगी। प्रायोजित लड़कियां थी क्योंकि वही लड़कियां जब गाली दे रहीं थीं  दिल्ली में तो वही नेस्ट  दिन बिल्कुल सेम बिहार में जाकर के वही आंदोलन में शरीक हो जाते दिखे थे। इस टाइप के एक वीडियो एक नहीं हजार वीडियो बनाए गए, तो यह क्या नेपाल की तरह यह भारत में भी तख्ता पलट करना था। आंदोलन करने के बाद सरकार को गिराना उद्देश्य था या बांग्लादेश की तरह  तख्ता पलट की उम्मीद से आंदोलन शुरू किया गया ,  मतलब जब देश भर में अराजक छात्र इकट्ठे निकलेंगे, वामपंथी छात्र निकलेंगे। मुख्यतः तो उसी से यह तो कोई अंतर नहीं कर पाएगा कि यह वामपंथी छात्र है या भाजपाई छात्र है तो वह सिर्फ छात्र ही माना जाएगा। हर घर में यह माना जाएगा कि छात्रों पर जुल्म कर रही है सरकार ये  नएरेटिव बनेगा, अल्टीमेटली सरकार को गिराना उद्देश्य था तो यह किस में क्या अमेरिका फंडिंग या चाइना देश की फंडिंग होगी या आम आदमी पार्टी, कांग्रेस , मार्क्सवादी पार्टी के द्वारा कहीं ना कहीं पीछे से सपोर्ट मिल रहा था कि सरकार हम डायरेक्ट नहीं गिरा पा रहे हैं, इस माध्यम से गिरा दें तो यह फंड देश भर में अराजकता फैलाता।वरना कोई छात्र यदि NEET के पेपर लीक होने पर व्यथित था तो वह आंदोलन में ये नारे नहीं लगता कि धारा 370  की फिर बहाली हो , कश्मीर को आज़ाद करो।ये सब सिद्ध करता है कि आंदोलन में आधे से ज्यादा विभिन्न पार्टियों के  कार्यकर्ता थे जो अपनी पार्टी के प्रचार के लिए आए थे वह चाहते थे कि ये आंदोलन इतना मजबूत हो जाए ,ये आंदोलन का विस्तार देश भर में हो मुख्यता उन प्रदेशों पर अराजकता फैलाई जाए जिन प्रदेशों में भाजपा की सरकार है आप देख रहे होंगे कि जिन प्रदेश में अराजकता छात्र के नाम पर फैली वो भाजपा शासित ही हैं ,जिन प्रदेशों में कांग्रेस या इंडी गठबंधन की सरकार है वहां कोई छात्र घर से नहीं निकला जैसे कर्नाटक ,तेलंगाना,पंजाब ,हिमाचल प्रदेश में कोई छात्र आंदोलन नहीं हुआ ,ये बात सिद्ध करती है कि पूरे आंदोलन में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के कार्यकर्ता ,उनके गुंडे ,उनकी पार्टी के छोटे पदाधिकारी दिल्ली के जंतर मंतर और बिहार बंगाल जैसे प्रदेशों में बवंडरी किया।

​दूसरी चीज यह सौरव दास जो आंदोलन की समाप्ति  के दिन पत्रकारों से बोले  कि  जो लोग  वह अभी कर रहे हैं कि वह पार्टी अभी शुरुआत है, अभी झांकी है, आगे की बाकी है तो यह आगे तक के आंदोलन भी करना चाहते हैं देश भर में किसी मुद्दे पर। क्या इनको सपोर्ट उसी तरह मिलेगा और यह क्या विदेशी फंडिंग इनकी होगी? क्या एक जांच करना चाहिए इनकी? क्या यह बिल्कुल साफ सुथरे थे? क्या साफ सुथरे भावना से ही नीट का एग्जाम कराने के लिए आए थे? क्योंकि नीट के लिए उन्होंने कोई मांग ना करके केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा में कैसे सुधार करना इस टाइप कोई अपना मसौदा प्रेस नहीं किया बल्कि सीधे तीन बातों पर अड़े रहे। अब प्रश्न यह है कि क्या आगे यह देश को हटाने के लिए विपक्ष की चाल है या विदेशी फंडिंग के द्वारा विदेशी लोग, विदेशी सरकारों द्वारा कहीं से पैसा अच्छा खासा इनको आ रहा है? क्या यह जांच का विषय नहीं है? क्या यह खतरे की घंटी नहीं है देश में? क्या भविष्य में इनके आंदोलनों को जांच करना चाहिए या इनकी कहीं भी आंदोलन बैठे सरकार को तुरंत रोक लगा देना चाहिए क्योंकि देश के इंटीग्रिटी के खिलाफ होगा इनका आंदोलन। और क्या यह भविष्य में राजनीति में नहीं आएंगे? आने का इनका प्रयोजन होगा, हालांकि ये तीनों जैसे  दीपके ,सौरभ दास थे और रांका थे, कह रहे हैं कि राजनीति में नहीं आएंगे पर आंदोलन देश भर में जारी रखेंगे।

जेन-जी, सोशल मीडिया का प्रभाव और आंदोलन का सांस्कृतिक पतन

 इस आंदोलन ने दिखा दिया कि सोशल मीडिया का क्या प्रभाव है आज कल यूथ में जिसे जेनरेशन जी कहा जा रहा ये पीढी है तेजी से निर्णय लेती है अपने अधिकारों को जानती है लड़ना जानती है और जनता में अपना प्रभाव कैसे जमाए इसे भी जानती है ,साथ में ये पीढी ओटीटी के प्रभाव  भद्दी अश्लील गाली देना  सीख गई है  जंतर मंतर में जो भीड़ एकत्र थी उसको शिक्षा के साथ संस्कार की बहुत जरूरत है क्योंकि जो मोदी जी  को अभद्र गाली दे जो देश के प्रधानमंत्री है उनकी तस्वीर को नग्न बनाकर फैलाना,हिंदू देवी देवताओं पर अमर्यादित टिप्पणी करना क्या इनको आज यही शिक्षा दी जा रही यदि दी जा रही तो ये डॉक्टर , इंजीनियर , बनने के बाद यही मां बहन की गालिया देंगी और ख़ास बात है ये है कि लड़के तो गाली दे ही रहे थे उनके साथ लड़कियां मोदी को गाली देती सोशल मोदी में दिखाई दीं,मैने खुद एक शॉर्ट  वीडियो इंस्टाग्राम में देखा जिसने तीन लड़कियों से उनका एक दूसरा साथी या पत्रकार पूछता है कि मोदी को शॉर्ट फॉर्म में क्या कहोगे तो तीन लड़कियों मोदी को मादर वाली गली देती है जिसका यह वर्णन करना गलत है, पर प्रश्न ये है कि क्या ये पीढी zen  z में मुख्यता लड़कियां गाली दे रही जबकि अभी तक लड़के गाली देते थे अब लड़कियां ऐसी गाली देती हैं जैसे कोठे की कोई  वेश्याएं फ़िल्मों में देती दिखती थीं ,उस आंदोलन में  मुझे नहीं लगता कि कोई छात्र था पर कुछ ऐसे बंदे थे जो मोदी की पॉलिसी से नाराज़ थे , लंबे समय तक धरना प्रदर्शन से ये परेशान हो चुके थे ,पर कोई नीट एग्जाम के लिए सीरियस नहीं था कोई ब्राह्मणवाद को गाली दे रहा था कोई ,मनुवाद को गाली दे रहा था कोई RSS को गाली दे रहा था कोई सीधे मोदी को अश्लील गलियां दे रहा था ।मुस्लिमों के लिए ये बहुत बड़ा आंदोलन था क्योंकि मुस्लिम भाजपा शासन से कहीं न कहीं नाराज़ थे अब उनको ये मौका लग रहा था कि सरकार अब गिरेगी तो मौके  में चौका लगाने के लिए उन्होंने बिरियानी खिलाना शुरू कर दिया ,जंतर मंतर के मैदान में सेकुलर छात्रों को। 

अब आप ये समझिए कि गाली देने के वीडियो बाकायदा प्रायोजित थे यानी कुछ लड़कियां जेएनयू या अन्य संस्थान की मां बहन की गाली हॉस्टल में देती रही उनको  गाली एक्सपर्ट बताकर बाकायदा गाली देने वीडियो बनवाने के लिए रुपया मिला तब वीडियो बनीं , इस तरह के मोदी को ,भाजपा को मां बहन की गाली देकर वीडियो बनाने का उद्देश्य भाजपा और मोदी समर्थकों को डी मोटिवेट करना था ,नीट एक बहाना था सरकार पर दबाव बनाकर पूरे देश को जेन जी आंदोलन में उपद्रव करवाना था इनकी मनसा बांग्लादेश और नेपाल की तरह छात्र आंदोलन करके तख्ता पलट करना था ,जब  देश भर में आंदोलन होते तो सरकार को जाना पड़ता ,प्रारंभ में ये प्रधान का इस्तीफ़ा मांग रहे थे फिर मोदी का इस्तीफ़ा मांगने लगे। मोदी पर अश्लील वीडियो बनाना मोदी की छवि को धूमिल करना था ।

मौजूदा कानूनों की कमियां और परीक्षा माफिया का नेटवर्क

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े से क्या छात्रों का हित हुआ बिल्कुल नहीं सरकार यदि कठोर कानून न बनाए तो क्या  नया शिक्षा मंत्री आने के बाद पेपर आउट नहीं होंगे ,होंगे निश्चित होंगे ,जब तक सारे नकल माफिया शिक्षा माफिया की सम्पत्ति जब्त न हो इनको  ताउम्र काल कोठरी में न डाला जाए , क्या इनके ऊपर NSA लग सकता है नहीं लग सकता क्योंकि इस बात को इस कानून में सम्मिलित नहीं किया  गया है क्या इन पर UAPA लग सकता है तो उत्तर नहीं लग सकता क्योंकि इसमें  पेपर आउट करने को  अपराध के रूप ही नहीं माना गया।क्या भारतीय न्याय संहिता BNS में इन शिक्षा माफिया पर नकेल कसने के लिए कोई कठोर कानून है तो  उत्तर है नहीं। क्या उन अपराधियों को जो संगठित होकर पेपर आउट करवाने के लिए षडयंत्र करते है इन को कठोर  कारावास अभी तक मिली तो उतर है नहीं सभी बेखौफ बाहर घूमते है इसके बदले पेपर आउट करवाने , एक  व्यक्ति को पैसे लेकर फोटो मिक्सअप करके उसकी जगह दूसरे को बैठाने,सॉल्वर की व्यवस्था करने ,केंद्र व्यवस्थापक से साठ गांठ करके पेपर को आउट कराने या नकलचियों ये सॉल्वर को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने,जिन अध्यापकों को पेपर तैयार की जिम्मेदारी दी गई है उनसे पेपर आउट करवाना ,प्रिंटिंग प्रेस के अंदर अपने गैंग के लोगों की  एंट्री करवाना ,पेपर को प्रिंटिंग प्रेस से गुप्त स्थान तक लाने पर सेंधमारी,परीक्षा केंद्र तक लाने के बीच पेपर आउट कराने की रणनीति बनाना।कोचिंग माफिया और शिक्षा माफिया का ,केंद्र व्यवस्थापकों, शिक्षा अधिकारियों,ठेके पर एंजेसी लेने वाले ठगो का एक nexus (गठजोड़)है जो हर परीक्षा के वेकेंसी आने से ही सक्रिय हो जाता है और रिजल्ट आने तक सक्रिय रहता है।

नकल माफिया के खिलाफ कठोर कानून और सजा के सुझाव

अब एक ऐसा कानून बने कि इस संगठित गिरोह के  सभी सम्मिलित लोगों के एक साथ अपराधी घोषित कर एक साथ जेल भेजना, फास्ट ट्रायल कोर्ट  से एक महीने ने सजा का प्रावधान होना,बीस साल कम से कम सजा हो ,अपराधी पाए जाने पर पूरी संपति की सरकार द्वारा छीन लेना चाहिए । 

 सेना के पूर्व अधिकारी जिनको शौर्य चक्र उनकी ईमानदारी के कारण मिला हो उनको प्रिंटिंग प्रेस में रखना ,उनकी  निगरानी में ही पेपर के फाइनल होने पर प्रेस में छपाई करवाना आदि ,AI के अधिकतम प्रयोग से प्रश्न पत्र तैयार करना ,प्रिंटिंग प्रेस में रोबोट व्यवस्था का निर्माण हो ,पेपर करवाने का एक निश्चित ढांचा हो  । क्योंकि भारत में ही इतने ज्यादा पेपर लीक होते है ऑस्ट्रेलिया,कनाडा,चीन,जापान,अमेरिका ,ब्रिटेन में पेपर लीक क्यों नहीं होते।

छात्रों के हित के विपरीत यदि कोई नेता भी पेपर गिरोह में सम्मिलित हो तो उस पर और अधिक कठोर कार्यवाही होना चाहिए क्योंकि कुछ  दलों की  सरकार जब सत्ता में आती है तो वह शिक्षा माफिया को बचाने का कार्य तो करती ही है साथ में खुद इस अपराध में सम्मिलित हो जाती है 

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