अंध भक्ति किसे कहते हैं जानिए कौन होते हैं अंधभक्त

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  अंधभक्त किसे कहते हैं? अंध भक्त का शाब्दिक अर्थ- अंधभक्त का तात्पर्य हिन्दी शब्दावली के अनुसार वो भक्त जो आंख बंद कर दुसरों का अनुसरण करें। अनुयायी जो अपने नेता पर अधिक भरोसा करे । और  अपने विवेक का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।     अन्ध शब्द के अन्य मिश्रित शब्द अंध प्रेम-Blind love अंध भक्त-Blind supporter अंध विश्वास-  Superstition ,Blind Faith अंध राष्ट्रवाद -Blind Patriotism अंध-Blind भक्त- Worshiper भक्ति शब्द  का प्रयोग ईश्वर भक्ति ,मातृ भक्ति,पितृ भक्ति ,राष्ट्र भक्ति ,  आदि भक्त वो हैं जो   जो भक्ति करते है जो  किसी में श्रद्धा और आस्था और  विश्वास रखतें हैं।  जैसे -शिव भक्त , कृष्ण भक्त ,देवी भक्त ,राष्ट्र भक्त आदि हैं। जो भक्ति करते है अंधभक्त का तात्पर्य किसी भी व्यक्ति पर ऑंखमूँदकर विश्वास करने वाला अनुयायी। जिसमें व्यक्ति अपने विवर्क और तर्क का प्रयोग न करे। निरीश्वरवादी बौद्ध अन्य धर्म अनुयाइयों के धर्म ग्रंथ में अकल्पनीय बातों का खंडन करते है ,वो हिन्दू ,मुस्लिम ,ईसाइयों के धर्म ग्रथों में दिए गए कई कथानकों का खंडन करते है और कपोल कल्पित कहते हैं  और इन धर्मों में आस्था रख

परेश मैती आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में।

 परेश मैती आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में।

(Biography of paresh maithili artist)


परेश मैती आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में।


   परेश मैती आर्टिस्ट को भारतीय कला क्षेत्र में इन्हें "विलियम टर्नर ऑफ इंडिया " कहा जाता था।

आप एक छोटे से करियर के दौरान महान चित्रकारी की है।

मेरी के जलरंगों में जलरंगों की पारदर्शी गहराई दिखाई देती है।

प्रकृति हमेशा उनके महान परिवेश का हिस्सा रही है ,उन्होंने रेब्रान्त, टर्नर,कास्टेबल,विस्लोहोमर का अनुगमन किया।

प्रारंभिक जीवन--

परेश मैती आर्टिस्ट का जन्म 1965 में पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले तमलुक में हुआ था।

उन्होंने गवर्नमेंट ऑफ फाइन आर्ट कोलकाता से फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट की डिग्री प्राप्त की।

एम एफ ए कॉलेज ऑफ आर्ट नई दिल्ली से प्राप्त किया।

करियर----

परेश मैती ने 81 सोलो प्रदर्शनी अपने 40 साल के करियर में प्रदर्शित किए,प्रारम्भ में उन्होंने प्रकृति चित्रण ही किया परंतु बाद में मानवीय चित्रण किया।

उनकी  मुख्य पेंटिंग ग्राफ़िक क्वालिटी की हैं उनकी बनाई गई पेंटिंग का कलेक्शन  ब्रटिश म्यूज़ियम और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट नई दिल्ली में है।

इन्होंने भारत की सबसे लंबी पेंटिंग जिसकी लंबाई 850 फ़ीट है को पेंट किया है,अगस्त 2010 में 55 सोलो शो की वाटर की जो रवींद्र नाथ टैगोर की 15 कविताओं पर आधारित थीं,जिसका नाम शेषलेखा था जो 1941 में बनीं जिसको नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में प्रदर्शित किया।

 इनका विवाह आर्टिस्ट जयश्री वर्मन के साथ हुआ ,आप इस समय नई दिल्ली में रहकर कार्य कर रहे हैं।

अवार्ड--

2017-बिहार सरकार द्वारा पुरस्कार

2014-पद्मश्री अवार्ड

2014-कार्टियर अवार्ड ,मार्टीज़ स्विट्ज़रलैंड

2013-हाल ऑफ फेम(टाइम्स ऑफ इंडिया)

2012-दयावती मोदी अवार्ड आर्ट और शिक्षा

1999-हार्मोनी अवार्ड मुंबई

1990-आल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ़्ट सोसाइटी

1989-नेशनल स्कालरशिप अवार्ड ,भारत सरकार

1986-इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरियंटल आर्ट कोलकाता

प्रदर्शनी---

2019:आर्ट सेंट्रल हांगकांग

2019-विज़ुअल आर्ट सेंटर हांगकांग

2017-जहाँगीर आर्ट मुम्बई

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