परेश मैती आर्टिस्ट की जीवनी हिंदी में|
(Biography of Paresh Maiti Artist)
आप एक छोटे से करियर के दौरान महान चित्रकारी की है।
मेरी के जलरंगों में जलरंगों की पारदर्शी गहराई दिखाई देती है।
प्रकृति हमेशा उनके महान परिवेश का हिस्सा रही है ,उन्होंने रेब्रान्त, टर्नर,कास्टेबल,विस्लोहोमर का अनुगमन किया।
परेश मैती भारत के एक प्रसिद्ध समकालीन कलाकार (चित्रकार, मूर्तिकार और फोटोग्राफर) हैं। उनके जीवन और कलात्मक यात्रा का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है:
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
- जन्म: परेश मैती का जन्म 1965 में पश्चिम बंगाल के तमलुक (मिदनापुर जिले) में हुआ था।
- बचपन: उन्हें बचपन से ही कला का शौक था। मात्र 7 साल की उम्र में उन्होंने दुर्गा पूजा के कारीगरों को मूर्तियाँ बनाते देख कलाकार बनने का निर्णय लिया। अपनी शिक्षा का खर्च उठाने के लिए वे मिट्टी की मूर्तियाँ बनाकर बेचते थे।
- शिक्षा: उन्होंने कोलकाता के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) किया और फिर कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली से मास्टर ऑफ फाइन आर्ट्स (MFA) की डिग्री प्राप्त की। वे दोनों ही संस्थानों में अपनी क्लास के टॉपर रहे।
कलात्मक शैली और कार्य
परेश मैती अपनी विविध कला शैलियों के लिए जाने जाते हैं, जिसमें वॉटरकलर (जल-रंग), ऑयल पेंटिंग, मूर्तियाँ और फोटोग्राफी शामिल हैं।
- वॉटरकलर: उन्हें वॉटरकलर का उस्ताद माना जाता है। उनकी शुरुआती कलाकृतियों में नदियाँ, नाव और बंगाल के ग्रामीण परिदृश्य प्रमुख थे।
- विषय: उनकी कला में राजस्थान के रेगिस्तान, केरल के बैकवाटर्स, वाराणसी के घाट और वेनिस व जापान जैसे विदेशी शहरों की झलक मिलती है।
- प्रमुख कृति: उन्होंने दिल्ली हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 के लिए भारत की सबसे लंबी पेंटिंग्स में से एक बनाई है, जो लगभग 850 फीट लंबी है।
प्रमुख पुरस्कार और सम्मानउन्हें कला के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं:
- पद्म श्री (2014): भारत सरकार द्वारा दिया गया चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- रॉयल वॉटरकलर सोसाइटी, लंदन (2002): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता।
- डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (D. Litt.): 2024 में उदयपुर के सर पदमपत सिंघानिया विश्वविद्यालय द्वारा मानद उपाधि।
- अन्य पुरस्कार: ब्रिटिश काउंसिल विजिटरशिप (1993), हारमनी अवार्ड (1999), और पश्चिम बंगाल सरकार का सर्वश्रेष्ठ वॉटरकलर पुरस्कार (1985)।
प्रारंभिक जीवन--
परेश मैती आर्टिस्ट का जन्म 1965 में पश्चिम बंगाल के मेदनीपुर जिले तमलुक में हुआ था।
उन्होंने गवर्नमेंट ऑफ फाइन आर्ट कोलकाता से फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट की डिग्री प्राप्त की।
एम एफ ए कॉलेज ऑफ आर्ट नई दिल्ली से प्राप्त किया।
करियर----
परेश मैती आर्टिस्ट ने 81 सोलो प्रदर्शनी अपने 40 साल के करियर में प्रदर्शित किए|प्रारम्भ में उन्होंने प्रकृति चित्रण ही किया परंतु बाद में मानवीय चित्रण किया|
उनकी मुख्य पेंटिंग ग्राफ़िक क्वालिटी की हैं उनकी बनाई गई पेंटिंग का कलेक्शन ब्रटिश म्यूज़ियम और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट नई दिल्ली में है|
इन्होंने भारत की सबसे लंबी पेंटिंग जिसकी लंबाई 850 फ़ीट है को पेंट किया है|अगस्त 2010 में 55 सोलो शो की वाटर की जो रवींद्र नाथ टैगोर की 15 कविताओं पर आधारित थीं|जिसका नाम शेषलेखा था जो 1941 में बनीं जिसको नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में प्रदर्शित किया|
इनका विवाह आर्टिस्ट जयश्री वर्मन के साथ हुआ |आप इस समय नई दिल्ली में रहकर कार्य कर रहे हैं|
अन्य अवार्ड--
2017-बिहार सरकार द्वारा पुरस्कार
2014-पद्मश्री अवार्ड
2014-कार्टियर अवार्ड ,मार्टीज़ स्विट्ज़रलैंड
2013-हाल ऑफ फेम(टाइम्स ऑफ इंडिया)
2012-दयावती मोदी अवार्ड आर्ट और शिक्षा
1999-हार्मोनी अवार्ड मुंबई
1990-आल इंडिया फाइन आर्ट एंड क्राफ़्ट सोसाइटी
1989-नेशनल स्कालरशिप अवार्ड ,भारत सरकार
1986-इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरियंटल आर्ट कोलकाता
प्रदर्शनी---
2019:आर्ट सेंट्रल हांगकांग
2019-विज़ुअल आर्ट सेंटर हांगकांग
2017-जहाँगीर आर्ट मुम्बई
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