M. lakshmikant|Polity book| Review हिंदी में

 M. lakshmikant polity book review हिंदी में

M.lakshmikant की  Polity book बुक भारतीय संविधान और राजव्यवस्था की सबसे बेहतरीन बुक्स में गिनी जाती है,हर सिविल सेवा की तैयारी करने वाले स्टूडेंट के लिए ये बहुत ही लुभावनी किताब है क्योंकि इस किताब में हर तथ्य का विवेचन क्रमबद्ध सरल भाषा मे दिया गया है जिससे जो छात्र राजनीति विज्ञान और संविधान का इससे पूर्व अध्ययन नहीं किया हो वो  छात्र भी इसको रुचि पूर्वक आत्मसात कर सकता है। 

lakshmikant polity book review हिंदी में

     उसे  संविधान में दिए गए आर्टिकल से भय नही लगता,वह संविधान के निर्माण में 1600 ब्रिटिश कॉलोनी के विकास और उनके द्वारा निर्मित विभिन्न चार्टर के बारे में जानकारी प्राप्त करता है ,तत्त्पश्चात संविधान के अंकुरण को विकसित होता हुआ देखता है विभिन्न गवर्नर और गवर्नर जनरलों वायसरायों के समय की कैसे धीरे धीरे नागरिकों को विधायिका में प्रवेश करने की इजाजत मिली और अंततः 1935 का अधिनियम आया जो वर्तमान संविधान का बेस कहलाता है।


       आप जब इस पुस्तक को पढ़ेंगे तो आपको प्रस्तावना (Preamble) से ही संविधान पर  एक झलक दिख जाती है ,आगे इस पुस्तक में करीब 940 पेज 80 चैप्टर और 66 अपेंडिसेस  में पूरी बातों को समाहित किया गया है ,इस पुस्तक के 6th रिवाइज्ड  एडीसन में बहुत सी बातों को जोड़ा गया है जैसे GST कानून, बैकवर्ड आयोग,आपदा प्रबंधन क़ानून , नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी, जम्मु कश्मीर और लद्दाख में हुए बदलाव और संवैधानिक विकास को विस्तार से समझाया गया है।

  6th Edition में पिछले वर्ष आये हुए प्रीलिम्स और मैन्स के प्रश्न ,हर चैप्टर को लेटेस्ट पैटर्न पर अपडेट किया गया है। हर चैप्टर को रिवाइज्ड और अपडेट किया गया हौ  साथ मे  लेआउट कलर्ड किया गया है। ये विशेषताए हैं लक्ष्मीकांत की अंग्रेजी माध्यम की बुक और हिंदी माध्यम की बुक में।

एम. लक्ष्मीकांत की पुस्तक के 7वें संस्करण (7th Edition) में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं जो 2022 के बाद के अपडेट्स को कवर करते हैं:

​मुख्य अपडेट्स और बदलाव:

7वें संस्करण में ये महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं जो 6वें में नहीं थे:

  • 12 नए अध्याय: इनमें उपभोक्ता आयोग, ई-गवर्नेंस और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन जैसे विषय शामिल हैं।
  • नवीनतम संशोधन: 105वें और 106वें (महिला आरक्षण) संवैधानिक संशोधनों की पूरी जानकारी।
  • अपडेटेड डेटा: 2023-24 तक के सभी सरकारी आंकड़े और सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले।
  • संसदीय बदलाव: नई संसद भवन और आधुनिक कार्यप्रणाली का विवरण।
  • नए अध्याय: इसमें 'क्षेत्रीय परिषदों', 'नया केंद्र शासित प्रदेश (दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव)', और 'राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग' जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी जोड़ी गई है।
  • संवैधानिक संशोधन: 101वें से लेकर 106वें संशोधन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक, 2023) तक का पूरा विवरण शामिल है।
  • न्यायिक निर्णय: समलैंगिक विवाह और अनुच्छेद 370 को हटाने जैसे हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का विश्लेषण दिया गया है।
  • चुनाव और नियुक्तियां: मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के नए नियमों और 2024 के आम चुनावों से संबंधित डेटा को अपडेट किया गया है।
  • नए अपडेट्स में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भी जोड़ा गया है ।नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह आरक्षण सीधे चुनाव के माध्यम से भरी जाने वाली सीटों पर लागू होगा और इसमें SC/ST महिलाओं के लिए कोटा भी शामिल है। यह व्यवस्था लागू होने की तिथि से 15 वर्षों के लिए वैध रहेगी, जिसे संसद बाद में बढ़ा सकती है। इसे ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है जो देश के नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण को सुनिश्चित करेगा।
  • नए अपडेट्स में चुनाव आयोग में  इसके बारे में भी जोड़ा गया है , संसद में चुनाव आयुक्तों के चयन प्रक्रिया में संशोधन संबंधी अधिनियम 2023 में पारित किया गया एम. लक्ष्मीकांत की पुस्तक में चुनाव आयोग की नियुक्ति से संबंधित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्य अवधि) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों को जोड़ा गया है।
  • ​इस नए कानून के अनुसार नियुक्ति की प्रक्रिया इस प्रकार है:
  • चयन समिति: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक समिति होगी, जिसमें लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे।
  • खोज समिति (Search Committee): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की एक समिति पांच नामों का पैनल तैयार कर चयन समिति को देगी
  • राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति: चयन समिति की सिफारिश के आधार पर राष्ट्रपति इन पदों पर नियुक्ति करेंगे।
  • ​सुप्रीम कोर्ट के 'अनूप बरनवाल' मामले के फैसले के बाद सरकार ने यह नया कानून बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया को वैधानिक रूप दिया है।
  •   M lakshmikant की बुक एक बिंदु को विस्तार से समझाया गया है , उसके कथानक को पहले उजागर किया गया है ,जिससे मालूम होता है कि संविधान निर्माण में क्या क्या डिबेट हुए संविधान सभा मे संविधान के हर आर्टिकल पर पक्ष और विपक्ष की संभावनाएं व्यक्त की गई , इस संविधान को विस्तार से समझने के लिए जनता के बीच लोकतंत्र को जागृति करने के लिए कई विशेषतायें अन्य देशों के संविधान से भारत मे जोड़ी गईं कनाडा का संविधान हो या ऑस्ट्रेलिया का संविधान हो या अमेरिका का या फिर जर्मनी या आयरलैंड  इन से कई विशेषताएं लेकर भारत के संविधान को विस्तृत किया गया।

जैसे मूल कर्तव्यों के चैप्टर में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशें ,मूल कर्तव्यों की सूची ,मूल कर्तव्यों की विशेषताएं,मूल कर्तव्यों की आलोचना ,मूल कर्तव्यों का महत्व ,वर्मा  समिति की  टिप्पणियां दी गईं हैं।

 इसी तरह राज्य के नीति निदेशक तत्वों में नीति निदेशक तत्वों की विशेषतया, निदेशक तत्वों का वर्गीकरण समाजवादी सिद्धान्त,गांधीवादी सिद्धान्त,उदार बौद्धिक सिद्धान्त को समझाया गया है।नए निदेशक तत्व,नए निदेशक तत्वों को संविधान में सम्मिलित करने की सिफ़ारिश की थी, निदेशक तत्वों की आलोचना,निदेशक तत्वों की उपयोगिता ,मूल अधिकार एवं निदेशक तत्वों में टकराव,निदेशक तत्वों का क्रियान्वयन।

  इस प्रकार आप यदि संविधान को  अच्छी तरह से जनाना चाहते हो तो इस विश्लेषणात्मक बुक को पढ़िए , और यदि सिविल सेवा की तैयारी में लगे हो तो पहली बार इस बुक को पढिये और कुछ शार्ट नोट्स बनाये ,फिर दूसरी और तीसरी बार पढ़ते समय कुछ विस्तार से विवेचनात्मक नोट्स बना लें ,जो आपको प्रीलिम्स में आने वाले कथन  कारण वाले प्रश्न को समझने में सहायता करेगा वहीं आपको मैन्स GS के लिए भी नोट्स बनाने में सहायक होगा।इस तरह आप पूरे संविधान को सरलता से आत्मसात कर सकते है साथ मे मैन्स में अपनी लेखनी से परीक्षक को  समझाने में सफ़ल हो सकते हैं।

  यदि  इस पुस्तक के आलोचनात्मक व्यू को देखें यह पुस्तक अन्य वनडे Exam जैसे रेलवे ,SSC,आदि के लिए कोई खास फायदा नहीं पहुंचा सकती क्योंकि इसने फैक्ट कम है बल्कि विश्लेषण अधिक हौ ,जबकि  सामान्यता वनडे Exam  में  फैक्ट बेस्ड प्रश्न ही रखे जातें है।इसके लिए छात्रों को NCERT की बुक्स और वाणी प्रकाशन के संविधान की पुस्तक को आधार बनाना चाहिए। परंतु यदि गहराई से ज्ञान प्राप्त करना है तो कोई भी छात्र इसे दो महीने में पूरी बुक पढ़ डालना चाहिए।

तैयारी की रणनीति और पुस्तक की संरचना का महत्व

​एम. लक्ष्मीकांत की पुस्तक की एक सबसे बड़ी खूबी इसकी 'टेबुलर प्रेजेंटेशन' (Table Presentation) है। जटिल संवैधानिक प्रावधानों को जिस तरह से तालिकाओं और तुलनात्मक चार्ट के माध्यम से समझाया गया है, वह किसी अन्य पुस्तक में मिलना मुश्किल है। उदाहरण के तौर पर, जब पाठक राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों की तुलना करता है, या मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के बीच के बारीक अंतर को समझना चाहता है, तो यह पुस्तक उसे रटाने के बजाय 'विजुअल लर्निंग' का अनुभव देती है।

स्वर्ण सिंह समिति और मूल कर्तव्यों का समावेश

​जैसा कि आपने जिक्र किया, मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के अध्याय में सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि कैसे आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए इन कर्तव्यों को जोड़ा गया। पाठक यह जान पाते हैं कि मूलतः संविधान में कर्तव्यों का उल्लेख न होना और बाद में इनका समावेश करना भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता का प्रतीक है। पुस्तक में केवल 11 कर्तव्यों की सूची ही नहीं, बल्कि उनके पीछे के विधिक और नैतिक तर्क भी बखूबी दिए गए हैं।

प्रीलिम्स और मेन्स के लिए 'वन-स्टॉप सॉल्यूशन'

​किसी भी गंभीर छात्र के मन में यह सवाल होता है कि क्या यह किताब मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए पर्याप्त है? इसका उत्तर इसकी विश्लेषणात्मक गहराई में छिपा है। अध्याय के अंत में दिए गए 'Notes and References' शोध करने वाले छात्रों के लिए खजाना हैं। इसके अलावा, पुस्तक के अंत में दिए गए पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र और मॉडल टेस्ट पेपर पाठक को अपनी तैयारी का वास्तविक आकलन करने का मौका देते हैं। यह पुस्तक केवल एक टेक्स्टबुक नहीं, बल्कि एक गाइड की तरह काम करती है जो आपको बताती है कि किस टॉपिक से किस तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

अपेंडिसेस (Appendices) का खजाना

​अक्सर पाठक किताब के मुख्य अध्यायों को पढ़कर रुक जाते हैं, लेकिन लक्ष्मीकांत की असली ताकत इसके परिशिष्ट (Appendices) में भी है। इसमें संविधान के अनुच्छेदों की सूची, संघ, राज्य और समवर्ती सूची के विषय, और वरीयता क्रम (Order of Precedence) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। परीक्षा के अंतिम दिनों में त्वरित रिविजन (Quick Revision) के लिए ये 66 परिशिष्ट किसी रामबाण से कम नहीं हैं।

निष्कर्ष: क्या यह निवेश सार्थक है?

​अंत में, यदि आप सिविल सेवा या किसी भी राज्य स्तरीय प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो एम. लक्ष्मीकांत का 7वां संस्करण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। इसकी सरल भाषा, रंगीन लेआउट और समसामयिक मुद्दों (जैसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम और चुनाव आयोग के नए नियम) का समावेश इसे बाजार में उपलब्ध अन्य पुस्तकों से मीलों आगे खड़ा करता है। यह पुस्तक आपको केवल एक 'एस्पिरेंट' नहीं बनाती, बल्कि भारतीय राजव्यवस्था का एक जागरूक नागरिक भी बनाती है।


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