जगदीश स्वामीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni

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जगदीश स्वमीनाथन Jagdeesh Swaminathan Artist ki Jivni जगदीश स्वामीनाथ( Jagdeesh Swaminathan ) भारतीय चित्रकला क्षेत्र के वो सितारे थे जिन्होंने अपनी एक अलग फक्कड़ जिंदगी व्यतीत किया ,उन्होंने अपने बहुआयामी व्यक्तित्व में जासूसी उपन्यास भी लिखे तो सिनेमा के टिकट भी बेचें।उन्होंने कभी भी अपनी सुख सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं दिया ।   जगदीश स्वामीनाथन का बचपन -(Childhood of Jagdish Swminathan) जगदीश स्वामीनाथन का जन्म 21 जून 1928 को शिमला के एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ।इनके पिता एन. वी. जगदीश अय्यर एक परिश्रमी कृषक थे एवं उनकी माता जमींदार घराने की थी  और तमिलनाडु से ताल्लुक रखते थे। जगदीश स्वामीनाथन उनका प्रारंभिक जीवन शिमला में व्यतीत हुआ था ।शिमला में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की यहां पर इनके बचपन के मित्र निर्मल वर्मा और रामकुमार भी थे। जगदीश स्वामीनाथन बचपन से बहुत जिद्दी स्वभाव के थे,उनकी चित्रकला में रुचि बचपन से थी पर अपनी जिद्द के कारण उन्होंने कला विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया। उन्होंने हाईस्कूल पास करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय की PMT परीक्षा (प्री मेडिकल टेस्ट) में

OMR का full form क्या होता है

OMR का full form क्या होता है

OMR का क्या मतलब होता है

OMR का full form क्या होता है

OMR का full फॉर्म है ---optical mark rcognition

ओ.एम.आर. का full form है-ऑप्टिकल मार्क रकॉग्निशन

0MR को ऑप्टिकल मार्क रीडर ,Optical Mark Reader भी कहते हैं.

OMR का full form क्या होता है

OMR  तकनीक का उपयोग तब होता है जब हम  विभिन्न सूचनाओं को एकत्र करने में विकल्पों के प्रयोग करते है। इसमें कागज में विकल्प के सामने के खाने में निशान न लगाकर सही विकल्प के समाने के गोले को काला करना पड़ता है।

 किसी एक विकल्प के सही होने पर उस खाली गोले (circle)को ब्लैक रंग से ठीक प्रकार से रंगते है कि गोले का कुछ भी भाग बचा न रह पाए।

OMR तकनीक का प्रयोग बैंकिंग क्षेत्र में ,बीमा कंपनियों में विभिन्न एप्लीकेशन को भरने के लिए ,सर्वे एजेंसियों में, परीक्षाओं का संचालन करने वाली एजेंसियां तथा परीक्षा आयोग द्वारा होता है ,फीडबैक प्राप्त करने कंपनियां OMR सीट का प्रयोग करतीं है ,इनमे उत्तर दाता को तीन विकल्पों में एक विकल्प का चयन करना पड़ता है।

OMR का क्या तात्पर्य होता है---

 विभिन्न ऑफिस में दस्तावेजो (documents)को एकत्र रखने में , विभिन्न प्रकार के सर्वेक्षणों (survey) जो CSO आदि भारत सरकार के  संस्थान तथा प्राइवेट सर्वे कंपनियां करती रहतीं है,उसमे OMR टेकनीक का प्रयोग होता है ,आज कल ज्यादातर परीक्षा बोर्ड/विश्वविद्यालय/संस्थान एक दिवसीय परीक्षाएं कराते है ,इन एक दिवसीय परीक्षाओं में सही वैकल्पिक उत्तरों के सामने के गोले को पूरी तरह काला करने का निर्देश परीक्षा बुकलेट में दिया रहता है। एक भी प्रश्न के अधूरे रंग जाने पर विद्यार्थी के उस प्रश्न के सही उत्तर को भी कंप्यूटर शून्य  मान लेता है क्योंकि इन OMR सीट का मैन्युअली निरीक्षण नही होता इसलिए बहुत सावधानी से परीक्षार्थी को पूरा गोला काला करने की हिदायत दी जाती है।omr में किसी अन्य गोले में टिक मार्क या क्रॉस का निशान नही लगाना चाहिए।

 One Day Exam की कॉपी कैसे (answer sheet) जांची जाती हैं--------

OMR को जब स्कैनर से गुजारा जाता है तो स्कैनर से लेजर लाइट निकलती है ,लेज़र लाइट में काले गोले में कम तीव्रता से प्रकाश परावर्तित होता है वही जहां कुछ भी नहीं भरा गया खाली जगह है वहां पर लेजर प्रकाश की  तीव्रता अधिक होती है , इस लेजर लाइट को सॉफ्टवेयर  रकॉग्निशन (पहचान करता है)करता है और सही गोले को काउंट करके परीक्षार्थी के कुल(total) अंक (marks)बता देता है।

 OMR के लाभ----

 1)समय की बचत ---

OMR सीट के जांचने में लगभग दस हजार आंसर सीट को एक घण्टे में कंप्यूटर की मदद से जांच सकते है , जबकि यदि OMR का उपयोग नही करते तो बहुत ही ज्यादा समय लगता है।

 2)कम गलतियां--

OMR से सर्वे करने डेटा एकत्रीकरण में बहुत जल्दी होने के गलतियां भी बहुत कम होती है । जब आप कीबोर्ड से डेटा एकत्र करते हो उसे इनपुट करते हो तो तारीख आदि में ग़लती हो जाती है ,जब हम किसी उत्पाद का त्वरित (fast) सर्वेक्षण करते है तो बिना गलती के शीघ्रता से रिजल्ट मिल जाता है।

OMR के नुकसान --

OMR में नुकसान भी है यदि हमने उत्तर पत्रक में कहीं भी छोटा सा बिंदु दूसरे गोले में छोड़ दिया ,  या फिर गोले के बाहर तक काला कर दिया या फिर गोले के अंदर धोखे  से भी कोई लाइन खिंच गई  तब भी उत्तर अमान्य हो जाएगा यदि दो गोलों में स्याही लगी है। यदि आप एक बार उत्तर पत्रक में गोला काला कर देते हो तो फिर उसे सही नही कर पाते।

 सर्वेक्षण (survey) करने में यदि एक ही विकल्प है तो  OMR काम नही करेगा। यानी OMR तभी सफल हो सकता है जब किसी प्रश्न में  एक से अधिक विकल्प हों ।

निष्कर्ष---

 इस तरह निष्कर्ष रूप में हम कह सकते है कि OMR तकनीक से एक दिन में ही परीक्षा का रिजल्ट आ सकता है तो परीक्षार्थियों के धोखे के लिए OMR दूसरा मौका नही देता प्रश्न सही करने के लिए।

पढ़ें-SSC का full form क्या है?



Comments

  1. Content आपने काफी अच्छा लिखा है | Theme जरुर change करे इससे आपका ब्लॉग और अच्छा लगेगा |

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  2. Robins Raj जी मेरे ब्लॉग में सर्च करने के लिए आपको धन्यवाद, अवश्य सुधार करूँगा।

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