Samsung M-12 phone review

Image
  Samsung M-12 phone review-- https://amzn.to/3IrqUdm Features & details 48MP+5MP+2MP+2MP Quad camera setup- True 48MP (F 2.0) main camera + 5MP (F2.2) Ultra wide camera+ 2MP (F2.4) depth camera + 2MP (2.4) Macro Camera| 8MP (F2.2) front came 6000mAH lithium-ion battery, 1 year manufacturer warranty for device and 6 months manufacturer warranty for in-box accessories including batteries from the date of purchase Android 11, v11.0 operating system,One UI 3.1, with 8nm Power Efficient Exynos850 (Octa Core 2.0GH 16.55 centimeters (6.5-inch) HD+ TFT LCD - infinity v-cut display,90Hz screen refresh rate, HD+ resolution with 720 x 1600 pixels resolution, 269 PPI with 16M color Memory, Storage & SIM: 4GB RAM | 64GB internal memory expandable up to 1TB| Dual SIM (nano+nano) dual-standby  Product information OS ‎Android 11 RAM ‎4 GB Product Dimensions ‎1 x 7.6 x 16.4 cm; 221 Grams Batteries ‎1 Lithium ion batteries required. (included) Item model number ‎Galaxy M12 Wireless communicatio

COPD A Chronic Disease- लक्षण, बचाव,उपचार


 COPD A Chronic Disease-लक्षण, बचाव,उपचार

COPD A Cronic Disease,, लक्षण, बचाव,उपचार
फेफड़े का चित्र ,COPD रोग में फेफड़े के  अंदर दिखने वाली वायु कुपिकाओं में सूजन आ जाती है।

C O P D यानी क्रोनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से संबंधित बीमारी है, हर वर्ष 20 नवंबर को विश्व सी ओ पी डी दिवस इसीलिए बनाया जाता है कि इस रोग के बारे में जागरूकता बचाव उपचार के बारे में आम जनमानस को जागरूक किया जा सके ,यह रोग अस्थमा से मिलता जुलता है परंतु दोनों में अंतर है, अस्थमा भी  फेफड़ों  की बीमारी है ,  अस्थमा को तो  नियंत्रित किया जा सकता है  पर " सी. ओ. पी. डी. "को नियंत्रित करना कहीं ज्यादा कठिन है ,इस रोग से पूरी दुनिया मे  हर साल 15 लाख लोग मारे जाते हैं ,वहीं भारत में भी  हर साल 5 लाख लोंगो की मृत्यु सी. ओ. पी. डी. 
(COPD)नामक रोग से हो जाती है,  इस रोग के उपचार के बाद इसे काबू में तो रखा जा सकता है पर पूरी तरह ठीक नही किया जा सकता है ,  इस मर्ज में फेफड़ों के टिश्यूज  के क्षतिग्रत होने  से पीड़ित व्यक्ति अच्छी तरह से सांस नहीं ले पाता ,डॉक्टरों के अनुसार सी ओ पी डी का एक प्रमुख कारण धूम्रपान है,यदि रोग होने के बाद भी रोगी धूम्रपान की लत को नही छोड़ता तो बीमारी गम्भीर रूप धारण कर लेती है। फेफड़ों में सूजन आ जाती है और उसमें बलगम जमा होने लगता है,फेफड़ों की सामान्य संरचना विकारग्रस्त होने लगती है ।

 ये रोग क्यों होता है---- 

सी ओ पी डी रोग का जन्म अत्यधिक धूम्रपान से होता है , चैन स्मोकर्स के फेफड़े की वायु कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जातीं है ,  धुएं में काम करने वाले ,धुएं  वाले चूल्हे में खाना बनाने वाले , कभी कभी उन व्यक्तियों को भी इस रोग की संभावना होती है जो ख़ुद सिगरेट बीड़ी तो नहीं पीते परंतु वह सिगरेट पीने वालों के संपर्क में रहते हैं,क्योंकि जब धूम्रपान करने वाला व्यक्ति धुआं छोड़ता है तो धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति को ज्यादा नुकसान होता है ,इस तरह सिगरेट नहीं पीने वाला भी पैसिव स्मोकर कहलाता है। यानी ये  समझें कि धूम्रपान करने धुऐं के आसपास रहने वाले  व्यक्ति को ये रोग हो जाता है ।अस्सी प्रतिशत COPD के रोगी   धूम्रपान करने वाले ही हैं , गांव में उन महिलाओं में COPD के रोग से महिलाएं प्रभावित है जो आज चूल्हे में भोजन पाकाती हैं , मेट्रो शहर में लोग बिना सिगरेट पिये ही दस सिगरेट के बराबर धुआं निगल जातें हैं ।

 COPD रोग के लक्षण---- ---- ----

  • रोगी को खाँसी आती है।
  • खांसी के साथ बलग़म भी निकलता है
  • पीड़ित व्यक्ति गहरी सांस नही ले पाता पीड़ित व्यक्ति  की सांस फूलती है ।
  • रोगी लंबे समय तक गहरी सांस नही ले पाता बाद में धीरे धीरे ये स्थिति बिगड़ जाती है।
  • सी ओ पी डी  (COPD) की गम्भीर अवस्था मे     कारपल्मोनेल की समस्या पैदा होती है इस स्थिति में हृदय को फेफड़ों में रक्त भेजने में ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है ,कारपल्मोनेल की के लक्षणों में पैर और टखनों में सूजन आ जाती है।
  •  सामान्यता ये बीमारी 40 वर्ष के बाद ही शुरू होती है।
  •  रोग की गम्भीर स्थिति में रोगी सांस अंदर खींच लेता है परंतु सांस बाहर धीरे धीरे ही छोड़ पाता है।
  •  इस रोग का एक लक्षण रोगी सदैव थकान महसूस करता है ,उसका वजन भी कम होते जाता है।

COPD रोग से का संक्रमण काल--
 COPD यानि क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सी. ओ. पी. डी.) पीड़ितों में सामान्यता लंग्स अटैक कड़ाके की ठंढ और प्रदूषण बढ़ने पर पड़ता है  कानपुर के जी. एस. वी. एम.  मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर सुधीर चौधरी ने जुलाई 2018 से जून 2018 तक आये 1127 मरीजों के ऊपर रिसर्च किया ये शोध मौसम के हिसाब से बीमारियों के बदलाव में एक साल तक  तक लगातार किया गया  जिसके परिणामों से विशेषज्ञ हैरान हैं। इस शोध में पाया गया कि इसमें सर्वाधिक 47 प्रतिशत सी. ओ. पी. डी. के मरीज़ थे उसके बाद 12.5 प्रतिशत वायरल इन्फेक्शन(गले और साँस नली में संक्रमण)12 प्रतिशत दमा(अस्थमा),11 प्रतिशत फेफड़े की झिल्ली में पानी आने और निमोनिया के पांच प्रतिशत लक्षण वाले मरीज़ लंग्स कैंसर के चार प्रतिशत ,ब्रोंकिथेसिस के 3.5 प्रतिशत मरीज़ तथा आई. एल. डी. के 2.5 प्रतिशत मरीज़ थे।
         चौकाने वाली रिपोर्ट ये भी आई की अप्रैल में 60 प्रतिशत सी. ओ. पी. डी. के गंभीर मरीज लंग्स अटैक के साथ आए,जबकि सबसे कम मरीज़ मार्च में 32.5 प्रतिशत आए, जबकि पहले सी ओ पी डी के गंभीर मरीज़ दिसंबर और जनवरी के बीच आते थे।

 सी. ओ. पी. डी. के मरीज जुलाई में 50 फीसदी,अगस्त में 43 फीसदी,सितम्बर में 37 प्रतिशत ऑक्टूबर में 51 प्रतिशत नवंबर में 55 प्रतिशत दिसंबर में 42.5 प्रतिशत जनवरी में 51 प्रतिशत फरवरी में 53 प्रतिशत मार्च में 32.5 प्रतिशत ,अप्रैल में 60 प्रतिशत मई में 51.5 प्रतिशत थी जून में 38.5 फीसदी थी।
 डॉक्टर सुधीर चौधरी के अनुसार -" एक साल से रिसर्च में सामने आया है कि मौसम के हिसाब से  बीमारियों के प्रकार और समयावधि बदल रही है जो गंभीर है,इस पर राष्ट्रीय स्तर पर विषेसज्ञों के अनुसार विचार विमर्श किया जायेगा।

COPD रोग से बचाव---

  • टी बी और चेस्ट रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिये
  • इस रोग  से बचने के लिए धूम्रपान बन्द कर देना चाहिए , धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के धूम्रपान करते समय पास में नही रहना चाहिए।
  • धूल उड़ने वाली जगहों  में,धुएं फैली जगह में , जाने से बचे,बाहर प्रदूषण वाली जगहों में मुंह मे मास्क लगाकर निकलें।
  •  सीमेंट की फैक्ट्री या केमिकल की फैक्ट्री में निकलने वाले धुएं के संपर्क वाले कर्मचारियों को मास्क लगाकर काम करना चाहिए।

  • वजन को नियंत्रित रखें न अधिक हो न ही बिल्कुल कम ,अधिक वजन होने से से शरीर मे ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
  • रसोइ घर मे गैस धुवें की निकासी के लिए  समुचित व्यवस्था  (proper ventilation) होनी चाहिए ।
  • COPD के मरीजों को ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए ,जिसमे नाक से सांस धीरे धीरे खींचकर मुंह खोलकर ओंठों के सहारे सांस बाहर निकालनी चाहिए।
  • जिस घर मे पेंट हो रहा है वहां जाने से बचना चाहिए।
  • COPD रोगी को इन्हेलर सदैव अपने पास रखना चाहिए।

 COPD रोग का क्या   इलाज  है ??   -----
सी. ओ. पी. डी. में  ब्रांकोडायलेटर की जरूरत पड़ती है जिनके अंदर स्टराइड को सीधे फेफड़ों के वायु नलिकाओं तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है इसके लिए इनहेलर का इस्तेमाल होता है,इसमें दवा स्वांस के माध्यम से सीधे फेफड़े में पहुंचती है,अधिकांश दवाएं इनहेलर के रूप में ही इस्तेमाल होतीं हैं, कभी कभी रोगी के फेफड़ों में जीवाणुओं का भी संक्रमण हो जाता है,इससे फेफड़ों की क्षमता और कम हो जाती है रोगी को सांस लेने में तकलीफ होती है,बलगम भी निकलता है जो सफेद से बदलकर पीला या हरा हो जाता है,इस स्थिति में जब रोगी सांस लेता है तो हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ,इसी स्थित के ज्यादा क्रिटिकल हो जाने पर रोगी के पर्याप्त ऑक्सीजन नही मिल पाती और रोगी की मृत्यु हो जाती है। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए आक्सीजन थेरेपी की जरूरत पड़ती है,रोग की गम्भीर स्थिति में डॉक्टर्स फेफड़े का प्रत्यारोपण भी करतें हैं। बहुत कम रोगियों को प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है।

  डेंगू बुख़ार से कैसे बचें ,पढ़े की पोस्ट को इस लिंक से--- जानलेवा डेंगू बुख़ार से कैसे बचें?
कृपया इस पोस्ट को भी पढ़ें इस लिंक से---
बरसात में होने वाले रोंगो से कैसे बचें
 कृपया इस पोस्ट को भी पढ़े ----
Full-form-of-HIV-and-AIDS, एड्स के लक्षण और बचाव

Comments

Popular posts from this blog

नव पाषाण काल का इतिहास Neolithic age-nav pashan kaal

Gupt kaal ki samajik arthik vyavastha,, गुप्त काल की सामाजिक आर्थिक व्यवस्था

मध्य पाषाण काल| The Mesolithic age, middle Stone age ,madhya pashan kaal