COPD A Chronic Disease-लक्षण, बचाव,उपचार
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| फेफड़े का चित्र ,COPD रोग में फेफड़े के अंदर दिखने वाली वायु कुपिकाओं में सूजन आ जाती है। |
C. O. P. D. यानी क्रोनिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज फेफड़ों से संबंधित बीमारी है, हर वर्ष 20 नवंबर को विश्व सी. ओ. पी. डी. दिवस इसीलिए बनाया जाता है कि इस रोग के बारे में जागरूकता बचाव उपचार के बारे में आम जनमानस को जागरूक किया जा सके ,यह रोग अस्थमा से मिलता जुलता है परंतु दोनों में अंतर है, अस्थमा भी फेफड़ों की बीमारी है , अस्थमा को तो नियंत्रित किया जा सकता है पर " सी. ओ. पी. डी. "को नियंत्रित करना कहीं ज्यादा कठिन है ,इस रोग से पूरी दुनिया मे हर साल 15 लाख लोग मारे जाते हैं ,वहीं भारत में भी हर साल 5 लाख लोंगो की मृत्यु सी. ओ. पी. डी.
ये रोग क्यों होता है----
सी. ओ. पी. डी. रोग का जन्म अत्यधिक धूम्रपान से होता है , चैन स्मोकर्स के फेफड़े की वायु कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जातीं है , धुएं में काम करने वाले ,धुएं वाले चूल्हे में खाना बनाने वाले , कभी कभी उन व्यक्तियों को भी इस रोग की संभावना होती है जो ख़ुद सिगरेट बीड़ी तो नहीं पीते परंतु वह सिगरेट पीने वालों के संपर्क में रहते हैं,क्योंकि जब धूम्रपान करने वाला व्यक्ति धुआं छोड़ता है तो धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति को ज्यादा नुकसान होता है ,इस तरह सिगरेट नहीं पीने वाला भी पैसिव स्मोकर कहलाता है। यानी ये समझें कि धूम्रपान करने धुऐं के आसपास रहने वाले व्यक्ति को ये रोग हो जाता है ।अस्सी प्रतिशत COPD के रोगी धूम्रपान करने वाले ही हैं , गांव में उन महिलाओं में C.O.P.D. के रोग से महिलाएं प्रभावित है जो आज चूल्हे में भोजन पाकाती हैं , मेट्रो शहर में लोग बिना सिगरेट पिए ही दस सिगरेट के बराबर धुआं निगल जातें हैं ।C.O.P.D रोग के लक्षण---- ---- ----
- रोगी को खाँसी आती है।
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खांसी के साथ बलग़म भी निकलता है
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पीड़ित व्यक्ति गहरी सांस नही ले पाता पीड़ित व्यक्ति की सांस फूलती है ।
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रोगी लंबे समय तक गहरी सांस नही ले पाता बाद में धीरे धीरे ये स्थिति बिगड़ जाती है।
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सी ओ पी डी (COPD) की गम्भीर अवस्था मे कारपल्मोनेल की समस्या पैदा होती है इस स्थिति में हृदय को फेफड़ों में रक्त भेजने में ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है ,कारपल्मोनेल की के लक्षणों में पैर और टखनों में सूजन आ जाती है।
- सामान्यता ये बीमारी 40 वर्ष के बाद ही शुरू होती है।
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रोग की गम्भीर स्थिति में रोगी सांस अंदर खींच लेता है परंतु सांस बाहर धीरे धीरे ही छोड़ पाता है।
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इस रोग का एक लक्षण रोगी सदैव थकान महसूस करता है ,उसका वजन भी कम होते जाता है।
COPD यानि क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सी. ओ. पी. डी.) पीड़ितों में सामान्यता लंग्स अटैक कड़ाके की ठंढ और प्रदूषण बढ़ने पर पड़ता है कानपुर के जी. एस. वी. एम. मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रोफ़ेसर डॉक्टर सुधीर चौधरी ने जुलाई 2018 से जून 2018 तक आये 1127 मरीजों के ऊपर रिसर्च किया ये शोध मौसम के हिसाब से बीमारियों के बदलाव में एक साल तक तक लगातार किया गया जिसके परिणामों से विशेषज्ञ हैरान हैं। इस शोध में पाया गया कि इसमें सर्वाधिक 47 प्रतिशत सी. ओ. पी. डी. के मरीज़ थे उसके बाद 12.5 प्रतिशत वायरल इन्फेक्शन(गले और साँस नली में संक्रमण)12 प्रतिशत दमा(अस्थमा),11 प्रतिशत फेफड़े की झिल्ली में पानी आने और निमोनिया के पांच प्रतिशत लक्षण वाले मरीज़ लंग्स कैंसर के चार प्रतिशत ,ब्रोंकिथेसिस के 3.5 प्रतिशत मरीज़ तथा आई. एल. डी. के 2.5 प्रतिशत मरीज़ थे।
चौकाने वाली रिपोर्ट ये भी आई की अप्रैल में 60 प्रतिशत सी. ओ. पी. डी. के गंभीर मरीज लंग्स अटैक के साथ आए,जबकि सबसे कम मरीज़ मार्च में 32.5 प्रतिशत आए, जबकि पहले सी. ओ. पी. डी. के गंभीर मरीज़ दिसंबर और जनवरी के बीच आते थे।
सी. ओ. पी. डी. के मरीज जुलाई में 50 फीसदी,अगस्त में 43 फीसदी,सितम्बर में 37 प्रतिशत ऑक्टूबर में 51 प्रतिशत नवंबर में 55 प्रतिशत दिसंबर में 42.5 प्रतिशत जनवरी में 51 प्रतिशत फरवरी में 53 प्रतिशत मार्च में 32.5 प्रतिशत ,अप्रैल में 60 प्रतिशत मई में 51.5 प्रतिशत थी जून में 38.5 फीसदी थी।
डॉक्टर सुधीर चौधरी के अनुसार -" एक साल से रिसर्च में सामने आया है कि मौसम के हिसाब से बीमारियों के प्रकार और समयावधि बदल रही है जो गंभीर है,इस पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार विचार विमर्श किया जायेगा।
C.O.P.D. रोग से बचाव---
- टी बी और चेस्ट रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिये
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इस रोग से बचने के लिए धूम्रपान बन्द कर देना चाहिए , धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के धूम्रपान करते समय पास में नही रहना चाहिए।
- धूल उड़ने वाली जगहों में,धुएं फैली जगह में , जाने से बचे,बाहर प्रदूषण वाली जगहों में मुंह मे मास्क लगाकर निकलें।
- सीमेंट की फैक्ट्री या केमिकल की फैक्ट्री में निकलने वाले धुएं के संपर्क वाले कर्मचारियों को मास्क लगाकर काम करना चाहिए।
- वजन को नियंत्रित रखें न अधिक हो न ही बिल्कुल कम ,अधिक वजन होने से से शरीर मे ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है।
- रसोइ घर मे गैस धुएं की निकासी के लिए समुचित व्यवस्था (Proper Ventilation) होनी चाहिए ।
- COPD के मरीजों को ब्रीदिंग एक्सरसाइज करनी चाहिए ,जिसमे नाक से सांस धीरे धीरे खींचकर मुंह खोलकर ओंठों के सहारे सांस बाहर निकालनी चाहिए।
- जिस घर मे पेंट हो रहा है वहां जाने से बचना चाहिए।
- COPD रोगी को इन्हेलर सदैव अपने पास रखना चाहिए।
आहार और पोषण (Nutrition in COPD)
COPD के रोगियों के लिए सही खान-पान बहुत जरूरी है, क्योंकि सांस लेने की प्रक्रिया में ही उनकी बहुत अधिक कैलोरी खर्च हो जाती है।
- प्रोटीन युक्त आहार: मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए दालें, अंडे और पनीर का सेवन।
- कार्बोहाइड्रेट का प्रबंधन: अधिक कार्बोहाइड्रेट शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) अधिक बनाते हैं, इसलिए जटिल कार्बोहाइड्रेट (जैसे चोकर वाला आटा) बेहतर हैं।
- हाइड्रेशन: बलगम को पतला रखने के लिए दिन भर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
2. मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health & COPD)
सांस लेने में कठिनाई अक्सर रोगी में एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन (अवसाद) पैदा करती है।
- लगातार बीमारी से लड़ते हुए मरीज को सामाजिक अलगाव महसूस होता है। लेख में यह जोड़ना जरूरी है कि मरीज को मानसिक संबल और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग भी देनी चाहिए।
3. पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन (Pulmonary Rehabilitation)
यह केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि एक व्यापक प्रोग्राम है।
- इसमें फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी सलाह और सांस लेने की विशेष तकनीकें सिखाई जाती हैं। इससे मरीज की अस्पताल में भर्ती होने की दर कम होती है और जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार होता है।
4. आधुनिक तकनीक और उपकरण
- पल्स ऑक्सीमीटर: आज के समय में हर COPD मरीज के घर में एक ऑक्सीमीटर होना चाहिए ताकि वे समय पर ऑक्सीजन लेवल (SpO_2) की जांच कर सकें।
- स्मार्ट इनहेलर्स: अब ऐसे इनहेलर्स आ गए हैं जो मोबाइल ऐप से जुड़े होते हैं और मरीज को दवा का समय याद दिलाते हैं।
5. टीकाकरण (Vaccination) - बहुत महत्वपूर्ण
COPD के मरीजों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। लेख में इन दो टीकों का उल्लेख जरूर करें:
- इन्फ्लूएंजा (Flu) वैक्सीन: हर साल लगवाना चाहिए। फ्लू वैक्सीन की कीमत अलग अलग ब्रांड जैसे abott,zydus की भिन्न भिन्न है जो लगभग एक हजार से पंद्रह सोलह सौ तक की जय कुछ ज़्यादा भी हो सकती है चूंकि फ्लू का वायरस हर साल अपना रूप बदल लेता है इसलिए हर साल फ्लू की वैक्सीन लगती है वैक्सीन लगवाने से पूर्व डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- न्यूमोकोकल (Pneumonia) वैक्सीन: जो फेफड़ों को गंभीर निमोनिया से बचाता है। सी ओ पी डी के मरीजों में सर्दी में निमोनिया की बहुत ज्यादा संभावना होती है निमोनिया से बचाव वैक्सीन से हो सकता है ।
6. वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के प्रति सतर्कता
मरीजों को सलाह दें कि वे अपने फोन पर AQI चेक करें। यदि AQI 200 से ऊपर है, तो उन्हें घर के अंदर ही रहना चाहिए और एयर प्यूरीफायर का उपयोग करना चाहिए।
डिसक्लेमर : यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे किसी पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या या दवा के सेवन से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श करें।"
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