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Review of fact history four बुक|किरण प्रकाशन|आर्य कॉप्टिशन| ज्ञान पुस्तक|महेश बरनवाल

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  Review of fact history four बुक: ज्ञान पुस्तक,महेश बरनवाल किरण प्रकाशन,आर्य कॉप्टिशन विषय प्रवेश--  यदि कोई छात्र इंटरमीडिट के एग्जाम पास करने के बाद कॉम्पटीशन लाइन में प्रवेश करता है तो उसे पुस्तको के चयन में बहुत कंफ्यूज़न होता है। इस review से इतिहास की सही बुक लेने में मदद मिलेगी। Review of four books  आज हम बाज़ार में उपलब्ध चार फैक्ट आधारित बुक्स का रिव्यु करता हूँ ।  क्योंकि ज़्यादातर वनडे एग्जाम रेलवे,एस एस सी, लेखपाल या पटवारी का एग्जाम ग्राम विकास अधिकारी ,कांस्टेबल का एग्जाम,SI का एग्जाम,असिस्टेन्स टीचर्स,DSSB आदि के एग्जाम में इतिहास के फैक्चुअल प्रश्न पूंछे जाते हैं हालांकि वो GS पर आधारित हैं पर उन प्रश्नों हल करने के लिए भी कुछ डीप स्टडी जरूरी है। इसके लिए आप या तो आप ख़ुद नोट्स तैयार करें या फ़िर इन बुक्स की मदद लेकर विभिन्न वनडे एग्जाम में हिस्ट्री के प्रश्नों को आसानी से सही कर पाने में सक्षम हो पाते हैं।  पहली पुस्तक की बात करते है जो इतिहास के फैक्ट पर आधारित है। ज्ञान इतिहास की । इस पुस्तक का संंपादन ज्ञान चंद यादव ने किया है।    इस बुक में इतिहास के बिन्दुओं को क्रमब

History Book review kiran competition times|S.K. Pande

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Review of किरण पब्लिकेशन हिस्ट्री बुक।SK पांडे हिस्ट्री बुक्स सिविल सेवा परीक्षा के लिए उपयोगी। प्रस्तावना-- UPSC का Pre एग्जाम हो या राज्य स्तरीय परीक्षा जैसे UPPSC ,MPPSC,RAS,बिहार ,उत्तराखंड ,सभी जगह की सिविल सेवा के परीक्षा में जो पेपर समान्य अध्ययन का आता है उसमें हिस्ट्री के प्रश्नों 25 प्रतिशत होते हैं।  हिस्ट्री के परीक्षार्थी जिनका मैन्स में एक ऑप्शन है या उन्होंने पहले भी स्नातक में हिस्ट्री को एक विषय कर रूप में पढ़ा है तो ,उनके लिए तो ये प्रश्न आसान प्रतीत होते हैं।  परंतु जो examnee ने अभी तक साइंस बैकग्राउंड या इंजीनियरिंग या मेडिकल बैकग्राउंड से स्नातक किया है। उनके लिए हिस्ट्री में थोड़ी अरुचि रहती है ।हिस्ट्री में प्रारंभिक रुचि और सरल अध्धयन के लिए तो क्लास 9th,10th,क्लास 11और 12th की NCERT को आधार बना सकते हो ।जिससे एक क्रमबद्ध इतिहास की जानकारी हो जाती है।  और साथ मे इतिहास मे रुचि भी पैदा हो जाती है। NCERT के बुक्स को आधार बनाकर आपको एक दो फैक्ट की बुक भी साथ मे रखना हितकर है क्योंकि ,जब आप हिस्ट्री की NCERT पढ़ते हो तो उसी चैप्टर के सभी फैक्ट उस बुक में नहीं मिलते बल

Ramkumar रामकुमार artist की जीवनी

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  राम कुमार का जन्म 23 सितंबर 1924 को शिमला में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था।रामकुमार के पिता पंजाब के शहर पटियाला में ब्रिटिश सरकार में एक सरकारी प्रशानिक पद में कार्यरत थे,रामकुमार के सात भाई और बहने थीं। रामकुमार ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज  से अर्थशास्त्र विषय मे M. A. किया ।      उनका कला के प्रति रुझान तब प्रारम्भ हुआ जब एक बार वह अपने मित्र के साथ अपने कॉलेज  सेंट स्टीफ़न से घर लौट रहे थे ,उस समय उन्होंने रास्ते मे कनॉट प्लेस पर लगी एक कला प्रदर्शनी में घूमने का अवसर मिला।वह उस कला प्रदर्शनी से अत्यधिक आकृष्ट हुए और अपने अंदर छिपी कला प्रतिभा को भी निखारने का निर्णय लिया। [रामकुमार आर्टिस्ट]       उन्होंने शारदा उकील स्कूल ऑफ आर्ट दिल्ली में कला शिक्षा प्राप्ति के लिए एडमिशन लिया ,यहाँ पर कला शिक्षा शैलोज मुखर्जी के निर्देशन में ग्रहण की और कला को बारीकी से जाना। इस दौरान उन्होंने कला की पूर्ण दक्षता प्राप्ति में बाधक अपने बैंक की  नौकरी से स्तीफा दे दिया। कला के उच्च पिपासा को शांत करने के लिए  उन्होंने पेरिस लजाने का निर्णय लिया और इसके लिए उन्होंने अपने पिता को रजामंद

आनंद कुमार स्वामी|कला समीक्षक| की जीवनी

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  आनंद कुमार स्वामी इंडियन आर्टिस्ट,कला समीक्षक की जीवनी--   जन्म - आनंद कुमार स्वामी का जन्म कोलंबो में 22 अगस्त सन1877 इसवी को हुआ था इनके पिता का नाम सर मुथुकुमार स्वामी था जो तमिल वंश के एक प्रसिद्ध न्यायाधीश थे।उनके पिता ने इंग्लैंड में जाकर बैरिस्टरी परीक्षा पास की ,इस परीक्षा को पास करने वाले वह पहले हिन्दू थे,इंग्लैंड में मुतुकुमार स्वामी ने एक अंग्रेज महिला एलिजाबेथ क्ले से विवाह कर लिया,   विवाहोपरांत आनंद कुमार स्वामी का जन्म हुआ।  विवाह के मात्र चार वर्ष  बाद ही मुतु कुमार स्वामी का देहांत हो गया। उस समय आनंद कुमार स्वामी केवल दो साल के थे।इसलिए  आनंद कुमार स्वामी का पालन पोषण उनकी माता ने ही किया और वहीं ब्रिटेन में आनंद कुमार स्वामी का बचपन बीता। प्रारंभिक शिक्षा-- आनंद कुमार स्वामी ने सन 1903 ईस्वी में लंदन से  भुगर्भविज्ञान(जियोलॉजी) में डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की इन्होंने सन 1903 से लेकर सन 1906 तक श्रीलंका सरकार के खनिज विभाग में निदेशक का पद भी संभाला इस दौरान उन्होंने खनिज पदार्थों के देशी समूह के आधार पर परिभाषित शब्दों का नया संग्रह बनाया,उन्होंने अंतरराष्ट्रीय श

जितिश कल्लट (Jitish Kallat )आर्टिस्ट की जीवनी

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जितिश कल्लट आर्टिस्ट की जीवनी:  जि तिश कल्लट   (Jitish Kallat)    का जन्म 14 जुलाई1974 में मुम्बई में हुआ था। आज भी यह मुम्बई में ही रहते है और 47 साल के हो चुके हैं ।यह पेंटिंग ,फोटोग्राफी,मूर्तिकला,कोलाज,इंस्टालेशन,मल्टी मीडिया में काम किया है, 2014 के कोच्चि  मुजरिश बिनाले के दूसरे संस्करण के कलात्मक निदेशक थे,वह इण्डिया फाउंडेशन फ़ॉर द आर्ट न्यासी बोर्ड के सदस्य भी हैं। इन्होंने एक कलाकार और आर्टिस्ट रीना सैनी  कल्लट से विवाह किया है। [जितिश कल्लट आर्टिस्ट] शिक्षा और चित्रण कार्य --      इन्होंने 1996 में जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट से  फाइन आर्ट की डिग्री प्राप्त की।BFA करने के बाद जितिश कल्लट ने पी. टी. ओ. शीर्षक से केमोल्ड प्रेसकार्ड रोड में पहली एकल प्रदर्शनी लगाई थी।  इनके  प्रारंभिक चित्रों में,जीवन चक्र,मृत्यु,जन्म, आकाशीय,पारिवारिक वंश,के  विषयों में कला कृतियां  दिखाई देतीं हैं ।      बाद में उनके चित्रों का केंद्रीय विषय शहर की छवि हो गई। इनके चित्रों में पॉप चित्रकार भूपेन खक्कर तथा ज्योतिभट्ट की कला शैली के दर्शन हो जाते हैं तो आधुनिकता वादी चित्रकार गुलाम मुहम्मद शेख और अतुल

भारतीय खेर आर्टिस्ट की जीवनी

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भारतीय खेर आर्टिस्ट की जीवनी--  भारती खेर एक समकालीन  आधुनिक कलाकार हैं।  लगभग तीन दशकों के करियर में, उन्होंने पेंटिंग, मूर्तिकला और इंस्टालेशन में काम किया है।     अपने पूरे अभ्यास के दौरान इन्होंने शरीर, उसके आख्यानों और चीजों की प्रकृति के साथ एक अटूट संबंध प्रदर्शित किया है।        श्रोतों  की एक विस्तृत श्रृंखला और प्रथाओं को बनाने से प्रेरित होकर, वह रेडीमेड को अर्थ और परिवर्तन के व्यापक दायरे में नियोजित करती है।      इस प्रकार खेर की कृतियाँ एक प्रतिरूप के रूप में संदर्भ और एक दृश्य उपकरण के रूप में विरोधाभास का उपयोग करते हुए समय के साथ चलती प्रतीत होती हैं।   प्रारंभिक जीवन---     खेर का जन्म 1969 लंदन, इंग्लैंड में हुआ था। उन्होंने 1987से 1988 तक मिडलसेक्स पॉलिटेक्निक ( Middlesex Polytechnic) , लंदन में अध्ययन किया।     और फिर 1988 से 1991तक न्यूकैसल पॉलिटेक्निक में कला और डिजाइन में फाउंडेशन कोर्स में बीए ऑनर्स प्राप्त किया। इनका विवाह प्रख्यात कलाकार चित्रकार सुबोध गुप्ता से हुआ है।      यहां पर ललित कला चित्रकारी सीखी वह 1993में भारत आ गईं, जहां वे आज रहती हैं और काम करत

विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी

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 विलियम मोरिस डेविस भूगोलविद की जीवनी: मोरिस डेविस का प्रारंभिक जीवन विलियम मोरिस डेविस का जन्म फिलाडेल्फिया  यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में हुआ था । डेविस ने हारवर्ड  से1869 में स्नातक की उपाधि ग्रहण की,सन 1870 से 1873 तक वह अर्जेंटीना के कार्डोबा के मौसम विज्ञान वेधशाला में सहायक के रूप में काम किया , हार्वर्ड से वापस लौटने के बाद इन्होंने वह भूगर्भीय व भूआकृति विज्ञान का अध्ययन किया,सन 1876 में उसे सहायक प्रोफेसर का शेलर का सहायक बना और उनके साथ रहकर भूगर्भ विज्ञान और भूआकृति विज्ञान का अध्ययन करने लगा 1878 में अस्सिटेंट प्रोफ़ेसर बने और 1899 में प्रोफ़ेसर नियुक्त हुए  1890  विलियम डेविस ने सार्वजनिक  स्कूलों में भूगोल के मानकों को निर्धारित किया उनके अनुसार प्राथमिक विद्यालयों ,माध्यमिक विद्यालयों में भूगोल को विज्ञान की तरह शिक्षा देना चाहिए ,डेविस ने भूगोल को विश्व विद्यालय स्तर पर पढ़ाये जाने के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रम बनाने में सहायता प्रदान की। 1904 में वह अमेरिका के सारे प्रशिक्षित भूगोलवेत्ताओं से मुलाकात की ,और इन शिक्षाविदों का संगठन तैयार किया। 1904 में एसोसिएशन ऑफ अमेरिकन जिओग