धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की जीवनी हिंदी में Dheerendra Krishna Shastri Biography Hindi me

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  Dheerendra Krishna Shastri का नाम  सन 2023 में तब भारत मे और पूरे विश्व मे विख्यात हुआ जब  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के द्वारा नागपुर में कथावाचन का कार्यक्रम हो रहा था इस दौरान महाराष्ट्र की एक संस्था अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति के श्याम मानव उनके द्वारा किये जाने वाले चमत्कारों को अंधविश्वास बताया और उनके कार्यो को समाज मे अंधविश्वास बढ़ाने का आरोप लगाया। लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी संबोधित करते हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की चमत्कारी शक्तियों के कारण लोंगो के बीच ये बात प्रचलित है कि बाबा धीरेंद्र शास्त्री हनुमान जी के अवतार हैं। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बचपन (Childhood of Dhirendra Shastri)  धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म मध्यप्रदेश के जिले छतरपुर के ग्राम गढ़ा में 4 जुलाई 1996 में हिन्दु  सरयूपारीण ब्राम्हण परिवार  में हुआ था , इनका गोत्र गर्ग है और ये सरयूपारीण ब्राम्हण है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग है व माता का नाम सरोज गर्ग है जो एक गृहणी है।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक छोटा भाई भी है व एक छोटी बहन भी है।छोटे भाई का न

Provision of Section 200 C.R.P.C.|सी. आर. पी. सी. की धारा200 में प्रावधान

सी.आर.पी.सी. की धारा 200 का प्रावधान।
Provision of Section 200 C.R.P.C.।

 आज हम समझने की कोशिश करतें हैं सी आर पी सी की धारा 200 के अंतर्गत क्या प्रावधान हैं.

सी. आर. पी. सी. की धारा 200  एक व्यक्ति को सीधे मजिस्ट्रेट को किसी मामले में  सीधे शिकायत का अवसर प्रदान करती है।कई बार जब पीड़ित पक्ष प्रतिवादी की शिकायत पुलिस के पास करने जाता है  और कोई घटना या अपराध के होने की जानकारी देता है तो पुलिस उस सूचना को  सुनने के बाद भी नजरअंदाज कर देती है । 

पुलिस के FIR या NCR दर्ज नहीं करने पर शिकायतकर्ता सीधे मजिस्ट्रेट के पास जा कर शिकायत करने का अधिकार सी आर पी सी की धारा 200 से प्राप्त करता है।इस धारा के अनुसार शिकायत करता यदि मजिस्ट्रेट को किसी अपराध के बारे में सूचना देता है तो परिवाद पर किसी अपराध का संज्ञान करने वाला मजिस्ट्रेट परिवादी(complainant) की शपथ(oath) पर परीक्षा(examine) करेगा ।और इसी तरह की परीक्षा परिवादी के साथ यदि कोई साक्षी(witness) भी परिवादी के साथ मजिस्ट्रेट के सामने उपस्थित है तो साक्षी की भी  शपथ पर परीक्षा मजिस्ट्रेट करेगा और इस  परीक्षा का सारांश लेखबद्ध करेगा  और इस लेखबद्ध परीक्षा के सारांश पर परिवादी के हस्ताक्षर होंगे उस साक्षी के हस्ताक्षर होंगे और मजिस्ट्रेट भी इस लेखबद्ध सारांश पर अपने हस्ताक्षर करेगा।

 परंतु यदि शिकायतकर्ता मजिस्ट्रेट को परिवाद (complaint) लिखकर देता है तो मजिस्ट्रेट को परिवादी या उपस्थित साक्षियों की परीक्षा करना आवश्यक नहीं होगा।

क)यदि परिवाद  किसी ऐसे लोकसेवक  के द्वारा किया जाता है जो  सरकारी ड्यूटी में लगा है अपने पदीय दायित्व के निर्वाहन कर रहा है।

ख) यदि मजिस्ट्रेट जांच (Inquiry )या  विचारण (Trial) के लिए मामले को किसी अन्य मजिस्ट्रेट के हवाले कर देता है। 

परंतु यदि मजिस्ट्रेट एक बार परिवादी की परीक्षा और उसके साथ उपस्थित साक्षियों की परीक्षा कर लेता है और उसके बाद वह सी. आर. पी. सी. की धारा 192 के अधीन मामले को किसी अन्य मजिस्ट्रेट के हवाले कर देता है  तो बाद वाला मजिस्ट्रेट परिवादी और साक्षियों की फिर से परीक्षा करना आवश्यक नहीं होगा।

निष्कर्ष--इस तरह कह सकते हैं कि कंप्लेंट केस जिसमें अपराध होने पर यदि पॉलिसी प्रथम सूचना रिपोर्ट प्रार्थी के कहने पर दर्ज नहीं करती तो मजिस्ट्रेट के पास अधिकार होता है कि वह पीड़ित पक्ष की बात को सुनकर संज्ञान ले और परिवाद के विषय को जांच करने के बाद अभियुक्त को समन के बाद कोर्ट में हाजिर होने के लिए बुलाये ,और आगे की प्रक्रिया को पूरा करे।

इस प्रकार एक आम व्यक्ति को न्याय पाने के दरवाजे न्यायालय में सदैव खुले रहते हैं।


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