नरेंद्र सिंह कपानी की जीवनी--
Biography Of
Narinder Singh Kapany
डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी: 'फादर ऑफ फाइबर ऑप्टिक्स' का विस्तृत सफर
नरेंद्र सिंह कपानी (Narinder Singh Kapany)
का जन्म 31 अक्टूबर 1926 को सिख परिवार में पंजाब के मोगा नामक स्थान पर हुआ था,यह एक भारतीय मूल के अमेरिकी इंजीनियर थे ,इन्होंने आर्डिनेंस फैक्ट्री में ऑफिसर रैंक में काम किया था ,इनको भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समय के रक्षा मंत्रालय वैज्ञानिक सलाहकार के पद के लिए भी आमंत्रण मिला था।
इनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून से हुई और बाद में आगरा विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया ,बाद में वह लंदन के इम्पीरियल कॉलेज से ऑप्टिक्स में PHD डिग्री प्राप्त की।कपानी ने1953 हेरोल्ड हापकिंस के साथ मिलकर फाइबर के ढेर सारे बंडल में एक साथ प्रकाश के साफ सुथरा प्रेषण पर उन्नत तकनीकी को ईजाद किया ।
यह प्रारंभ से तेज इनटरनेट पर कई शोध किए ,इसी दौरान इन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स शब्द का इस्तेमाल 1956 में किया जिसमें प्रकाश विधुत कणों के माध्यम से सूचना का आदान प्रदान एक प्लास्टिक नलिका से होता था।1960 में पहली बार साइंटिफिक अमेरिकन पत्रिका में एक लेख लिखा जिसमे फाइबर ऑप्टिक्स शब्द का प्रयोग किया।फाइबर ऑप्टिक्स में उन्होंने कई अनुसंधान किये और करीब 120 पेटेंट करवाये।उनके फाइबर ऑप्टिक्स रिसर्च का अनुप्रयोग बायोमेडिकल रिसर्च ,प्रदूषण नियंत्रण ,सोलर ऊर्जा के विकास में भी योगदान मिला।
फार्च्यून मैगजीन पत्रिका ने 22 नवंबर 1999 के अंक में उनके आधुनिक तीव्रगामी इंटरनेट के बेहतरीन योगदान के लिए "अनसंग हीरोज" के रूप में नामित कर उनका सम्मान किया।
इसीलिए इनको फाइबर ऑप्टिक्स का पितामह कहा जाता है।
|
प्रसिद्ध नाम |
फाइबर ऑप्टिक्स के पितामह (Father of Fiber Optics) |
|
कुल पेटेंट |
120 से अधिक |
|
प्रमुख पुस्तकें |
'फाइबर ऑप्टिक्स: प्रिंसिपल्स एंड एप्लिकेशन्स' (1967) |
|
सम्मान |
पद्म विभूषण, एक्सीलेंस 2000 अवार्ड (USA) |
आइए उनके जीवन को निम्न बिंदुओं से समझने का प्रयास करते हैं
1. बचपन की वह जिज्ञासा जिसने दुनिया बदली
डॉ. कपानी की रुचि प्रकाश (Light) में बचपन से ही थी। देहरादून में स्कूल के दौरान उनके एक शिक्षक ने उनसे कहा था कि "प्रकाश केवल सीधी रेखा में चलता है।" कपानी ने इस बात को चुनौती के रूप में लिया और यह साबित करने की ठान ली कि प्रकाश को मोड़ा भी जा सकता है। यही जिज्ञासा आगे चलकर फाइबर ऑप्टिक्स के आविष्कार का आधार बनी।
2. करियर और उद्यमिता (Entrepreneurship)
कपानी केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक सफल उद्यमी भी थे। उन्होंने सिलिकॉन वैली में अपनी पहचान बनाई:
- Optics Technology Inc: 1960 में उन्होंने अपनी पहली कंपनी शुरू की, जो सफल रही और बाद में सार्वजनिक (Public) हुई।
- Kaptron Inc: 1973 में उन्होंने अपनी दूसरी कंपनी की स्थापना की, जिसे बाद में AMP Inc ने खरीद लिया।
- उन्होंने कई दशकों तक स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं।
3. कला और संस्कृति के संरक्षक
विज्ञान के अलावा, डॉ. कपानी को सिख कला और इतिहास से गहरा लगाव था:
- उन्होंने 1967 में 'सिख फाउंडेशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य सिख विरासत और कला का संरक्षण करना था।
- उनके पास सिख कलाकृतियों का दुनिया का सबसे बड़ा निजी संग्रह था। उन्होंने सैन फ्रांसिस्को के एशियन आर्ट म्यूजियम को अपनी कई दुर्लभ कलाकृतियां दान में दीं।
4. नोबेल पुरस्कार और विवाद
यह विज्ञान जगत में अक्सर चर्चा का विषय रहता है कि डॉ. कपानी को उनके महान योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।
- 2009 में 'फाइबर ऑप्टिक्स' के लिए चार्ल्स के. काओ को नोबेल पुरस्कार दिया गया।
- विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. कपानी का काम काओ से पहले का था और उनके बिना इंटरनेट क्रांति संभव नहीं थी। हालांकि, डॉ. कपानी ने कभी इस पर मलाल नहीं किया और हमेशा अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखा।
5. व्यक्तिगत जीवन और विरासत
- उनका विवाह सतिंदर कौर से हुआ था, जिन्होंने उनके हर संघर्ष में साथ दिया।
- 4 दिसंबर 2020 को 94 वर्ष की आयु में कैलिफोर्निया में उनका निधन हो गया।
- मरणोपरांत, भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण (2021) से सम्मानित किया, जो उनके देश के प्रति प्रेम और उनके वैश्विक योगदान की स्वीकृति है।

.jpeg)
0 Comments
Please do not enter any spam link in this comment box