गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च होने वाली भारत की टॉप 50 हस्तियां। ​India's Top 50 Celebrities

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  भारत की टॉप 50 हस्तियां: गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले व्यक्तित्व। ​ India's Top 50 Celebrities: Most Searched Personalities on Google अक्सर लोगों के दिमाग में ये प्रश्न उठता रहता है कि गूगल में सबसे अधिक सर्च किन हस्तियों को लोग सर्च करते होंगे तो इसका उत्तर आपको इस ब्लॉग में मिल जाएगा। ​यह ब्लॉग उन 50 प्रभावशाली हस्तियों पर आधारित है, जिन्हें भारतीय सबसे अधिक खोजते हैं। इनमें खेल, राजनीति, मनोरंजन और व्यापार जगत के दिग्गज शामिल हैं।भारत की ये महान हस्तियां है जिन्हें गूगल में किसी न किसी विशेषता उनकी जीवनी उनके द्वारा हाल में लिए गए निर्णय या विशेष कार्य जिनका पूरे भारत की जनमानस पर प्रभाव पड़ा हो वह वैश्विक या भारतीय मीडिया द्वारा किसी प्रकरण किसी एक्शन के द्वारा कवरेज किया गया हो ,आम जन मानस पर  चाय की दुकानों ,चौपालों, पान की गुमटियों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों में उपस्थित लोगों के लिए चर्चा के बिंदु रहते हो , प्रिंट मीडिया में पढ़ने के बाद लोग उनकी अधिक जानकारी के लिए गूगल में सर्च करते हो। ये क्षेत्र सिनेमा ,राजनीति,खेल ,क्रिकेट ,या अन्य क्षेत्र हो परंतु भ...

नरेंद्र सिंह कपानी की जीवनी ( Narinder Singh Kapany )

 नरेंद्र सिंह कपानी की जीवनी--

Biography Of 

Narinder Singh Kapany

नरेंद्र सिंह कपानी (Narinder Singh Kapany)

का जन्म 31 अक्टूबर 1926 को सिख परिवार में पंजाब के मोगा नामक स्थान पर हुआ था,यह एक भारतीय मूल के अमेरिकी इंजीनियर थे ,इन्होंने आर्डिनेंस फैक्ट्री में ऑफिसर रैंक में काम किया था ,इनको भारत के पहले प्रधानमंत्री   जवाहर लाल नेहरू  के समय के रक्षा मंत्रालय वैज्ञानिक सलाहकार के पद के लिए भी आमंत्रण मिला था।

Narinder Singh Kapany

    इनकी प्रारंभिक शिक्षा देहरादून से हुई और बाद में आगरा विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया ,बाद में वह लंदन के इम्पीरियल कॉलेज से ऑप्टिक्स में PHD डिग्री प्राप्त की।कपानी ने1953 हेरोल्ड हापकिंस के साथ मिलकर   फाइबर के ढेर सारे बंडल में एक साथ प्रकाश के साफ सुथरा प्रेषण पर उन्नत तकनीकी को ईजाद किया ।

यह प्रारंभ से तेज इनटरनेट पर कई शोध किए ,इसी दौरान इन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स शब्द का इस्तेमाल 1956 में किया जिसमें प्रकाश विधुत कणों के माध्यम से सूचना का आदान प्रदान एक प्लास्टिक नलिका से होता था।1960 में पहली बार साइंटिफिक अमेरिकन पत्रिका में एक लेख लिखा जिसमे  फाइबर ऑप्टिक्स शब्द का प्रयोग किया।फाइबर ऑप्टिक्स में उन्होंने कई अनुसंधान किये और करीब 120 पेटेंट करवाये।

उनके फाइबर ऑप्टिक्स  रिसर्च का अनुप्रयोग बायोमेडिकल रिसर्च ,प्रदूषण नियंत्रण ,सोलर ऊर्जा  के विकास में भी योगदान मिला।


    फार्च्यून मैगजीन पत्रिका ने 22 नवंबर 1999 के अंक में उनके आधुनिक तीव्रगामी इंटरनेट के बेहतरीन योगदान के लिए  "अनसंग हीरोज" के रूप में नामित कर उनका सम्मान किया।

इसीलिए इनको फाइबर ऑप्टिक्स का पितामह कहा  जाता है।

इनकी मृत्यु के बाद  सन 2021 में इन्हें भारत सरकार ने दूसरे सिविलियन अवार्ड पद्म विभूषण की उपाधि से  सम्मानित किया।



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