अजंता की चित्रकला ..मेरी अजंता यात्रा और उनके गुफाओं के चित्र

अजंता की यात्रा ::
अजंता की चित्रकला
अजंता भ्रमण और अजंता की गुफाओं के विश्व प्रसिद्ध चित्र.
 सह्याद्रि पर्वतों के उत्तुंग शिखर जो आज भी हरियाली को समेटे है , चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ दिखाई देते है इस मनोरम स्थल को देखते निहारते हुए जब मैं टैक्सी में बैठे बैठे सोंच रहा था इस रमणीक स्थल में 2000 पहले से मौर्य,सातवाहन, वाकाटक ,राष्ट्रकूट जैसे राजवंशों ने अपनी शौर्य  गाथाएं लिखीं ,  मध्य काल में छत्रपति शिवाजी  के पराक्रम और शौर्य की ये वादियां गवाह है ,  एक नाथ तुकाराम और रामदेव जैसे महान संतो के भजन जिनसे समाज में नई चेतना मिली , मेरा मन प्रफुल्लित था इस वीर भूमि और  शांत भूमि में आकर प्रकृति के साथ अठखेलियां खेलते खेलते औरंगाबाद जिले के गांव फरदारपुर में अजंता के पास पहुंचा, टैक्सी वाले ने मुझे एक होटल में पहुँचाया वो बहुत सुविधाजनक तो नही था पर मैंने एक रात बिताने के लिए ठीक ही समझा , अगले दिन हमने एक टैक्सी ली जिसने दो घण्टे के बाद हमे उस तलहटी में पहुँचाया जहां से ऊपर जाना था अजंता गुफ़ा देखने के लिए ,  टैक्सी के ड्राईवर हमे ऊपर तो ले गए पर   चार किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया क्योंकि महाराष…

ITBP का full form क्या है


ITBP  का full form है --Indo Tibbat Border Police
आई टी बी पी ITBP


आई टी बी पी एक सीमा रक्षक बल है यह बल गृहमंत्रालय के अधीन रहकर काम करता है  24 ओक्टूबर 1962 में आई टी बी पी की स्थापना  भारत की चीन से लगी सीमा की रखवाली के लिए किया गया ,1962 में जब भारत चीन संघर्ष शुरू हुआ तब केवल चार सर्विस बटालियन से इसका  प्रारम्भ किया गया ,वर्तमान में आई टी बी पी 49  बटालियन हैं । ये बटालियन में क़रीब अस्सी हजार  जनशक्ति है,लद्दाख काराकोरम  दर्रे से अरुणाचल प्रदेश के दिफू ला तक 34888 किलोमीटर लंबी भारत चीन सीमाओं की रखवाली कर रही हैं,मानव युक्त सीमा चौकियां , 21हजार फिट की ऊंचाई तक स्थित हैं ,आई टी बी पी में अधिकांश कार्मिक पर्वतारोही या माउंटेनियर हैं।
    आई टी बी बी के सैनिको को सामान्यता शून्य से माइनस चालीस डिग्री सेलसियस  तापमान जहां अत्यधिक सर्दी,बर्फीली आँधियाँ आती हैं , पहाड़ों में हिम स्खलन तथा भूस्खलन होते ही रहते हैं ऐसे प्राकृतिक आपदाओं के बीच सीमा की सुरक्षा में तैनात रहना पड़ता है।
       आई टी बी पी  अब हिमाचल प्रदेश,उत्तराखंड ,नार्थ ईस्ट  में 8 क्षेत्रीय बचाव प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किये हैं जिनके माध्यम से इन क्षेत्रों में आपदा के समय बचाव और राहत कार्यों को पूर्ण किया जाता है,प्राकृतिक आपदाओं के समय इस बल को पहाड़ों में बचाव और राहत कार्यों में सिशेषज्ञता प्राप्त है,इस बल ने ही 2013 मे उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ में राहत और बचाव कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी,यह बल राहत और बचाव कार्यों के अंतर्गत चिकित्सा,  स्वास्थ्य और स्वच्छता की देखभाल के लिए बड़े कार्यक्रम आयोजित करता है।

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