Full form of GIF ,GIF का full form क्या है

G I F का full form होता है  Graphics Interchange Format यानि graphics का ऐसा फॉर्मेट जो interchange होता रहता है आप उन इमेजेज को GIF image भी कह सकते हो जो animated IMAGE हैं।

GIF का फुल फॉर्म ग्राफिक्स इंटरचेंज फॉर्मेट है। जीआईएफ एक बिटमैप छवि प्रारूप है जिसे 15 जून, 1987 को अमेरिकी कंप्यूटर वैज्ञानिक स्टीव विल्हाइट के नेतृत्व में बुलेटिन बोर्ड सेवा (बीबीएस) प्रदाता कम्पयू सर्व( compuserve) में एक टीम द्वारा विकसित किया गया था। एक एनिमेटेड तस्वीर बनाने के लिए जीआईएफ विभिन्न बिटमैप फ़ाइलों की एक श्रृंखला है। । यह एक 8 बिट प्रारूप है जिसका अर्थ है कि प्रारूप द्वारा समर्थित रंगों की अधिकतम संख्या 256 है। दो GIF मानक, 87a और 89a हैं।GIF 89 update   वर्जन है ,  प्रत्येक पिक्सेल में, यह GIF छवि में दो सौ और छप्पन में से एक रंग शामिल करता है। जीआईएफ आकार में छोटे और कॉम्पैक्ट हैं और आप उन्हें किसी भी प्लेटफॉर्म पर आसानी से साझा कर सकते हैं। जीआईएफ एक गतिशील छवि है जो बिना किसी ध्वनि के वीडियो की तरह है। यह एक iPhone की लाइव तस्वीर की तरह है। यह एक छोटी सी वीडियो क्लिप है जो खुद को तब तक रिप्…

आई टी आई(I.T.I) कैसे करें

आईटीआई का मतलब इंडस्ट्रीयल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट है , हिंदी में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान कहते हैं
ये संस्थान केंद्र सरकार के उद्यमिता मंत्रालय के अंतर्गत खोले गए हैं , जो सरकारी है परंतु 2005 के बाद प्राइवेट ITI खोलने के लिए भी दरवाजे सरकार ने  खोल दिए है ,जहां पहले ITI के किसी कोर्स में एडमिशन पाना बहुत कठिन था पर प्राइवेट ITI के खुल जाने से किसी अभ्यर्थी के मेरिट कम होने और सरकारी  संस्थान में सीट फुल हो जाने पर प्राइवेट संस्थान में एडमिशन पा सकता है।
आईटीआई से विद्यार्थी किसी एक विधा में  ट्रेनिंग लेता है , ट्रेनिंग अलग अलग ट्रेड की अलग अलग होती है , ट्रेनिंग में बेसिक तकनीकी जानकारी दी जाती हैं , जिससे की प्रशिक्षण पाने वाले छात्र को इतना ज्ञान हो जाए कि वो यदि  सरकारी या प्राइवेट जॉब भी नही प् पाये तो वो ख़ुद के लिए रोज़गार खोल सके।

       ITI के देश भर में सरकारी और गैर सरकारी संस्थान हैं ,सरकारी ट्रेनिंग कॉलेज क़रीब 2200 के करीब हैं वहीं करीब 9 हजार प्राइवेट संस्थान हैं।

आई टी आई(I.T.I) कैसे करें

  आई टी आई में योग्यता--
आई टी आई में योग्यता हर ट्रेड के लिए अलग अलग है ,जो क्लास  8th  पास , 10th पास    या क्लास 12th पास तक के स्टूडेंट के लिए है , क्लास 10 में कुछ पाठ्यक्रम किसी भी विधा यानि आर्ट्स साइंस कामर्स सभी के लिए है ,साथ में कुछ पाठ्यक्रम आर्ट्स सब्जेक्ट से इंटरमीडिएट पास सभी अभ्यर्थी के लिए हैं। आईटीआई में प्रवेश पाने के लिए आयु सीमा 14 साल न्यूनतम से 40 साल अधिकतम है। आई टी आई में प्रवेश लेने के लिए ये जरुरी नहीं की अंग्रेजी बहुत ज़्यादा आती हो या बिलकुल नही आती हो ,ये पाठ्यक्रम सिर्फ तकनीकी ज्ञान के लिए होता है जो इंडस्ट्री में कोई जॉब पाने के  लिए जरुरी है,या ख़ुद स्किल्ड होने पर अपना कोई छोटा मोटा उद्योग स्थापित कर सकें।

आई टी आई में कितनी फीस लगती है --
आईटीआई के आवेदन के समय ही 250 रुपये फॉर्म फीस लगती है उसके बाद सरकारी संस्थान में एडमिशन लेने पर कोई फीस नहीं लगती ,प्राइवेट संस्थान जो ग्रामीण क्षेत्र   में  हैं उनमे  दस हजार से 15 हजार तक फीस ली जाती है जो संस्थान शहरी क्षेत्र में हैं वहां पर 16 हजार से 18 हजार तक फीस लगती है  ।
    आईटीआई के लिए एडमिशन प्रोसेस--
आईटीआई एडमिशन के लिए ITI के साईट में जाकर देखना चाहिए ,प्रवेश परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन करना होता है जो जून लास्ट या जुलाई में विज्ञापित होता है , इस विज्ञापन में  निर्धारित शैक्षिक योग्यता  का डॉक्यूमेंट यानि हाइस्कूल या इंटरमीडिएट के  प्रमाणपत्र व अंकतालिका  , जाती/वर्ग प्रमाणपत्र यानि SC,OBC और EWS का आरक्षण चाहने वालों को प्रमाणपत्र। ,  आधार कार्ड की जरुरत पड़ती है, साथ में बैंक खाते का नम्बर क्योंकि छात्र को वजीफ़ा भी मिलता है कैटगरी के हिसाब से ।
आई टी आई में प्रवेश करने के लिए प्रदेश सरकारें और कुछ स्वायत्त संस्थान अपने संस्थान में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन करते हैं ,  प्रवेश परीक्षा में निर्धारित कट ऑफ में अंक पाने  वालों की कॉउंसलिंग में मेरिट बेसिस में हर संस्थान में एडमिशन होता है । और मेरिट के आधार पर ही ट्रेड मिल पाती है ,और अच्छे संस्थान में एड्मिसन हो पाटा है।
प्रवेश परीक्षा में सामान्य जागरूकता  यानि G K , न्यूमेरिकल एबिलिटी और तार्किक प्रश्न होते हैं।
आईटीआई आई में कौन से पाठ्यक्रम होते हैं---
आई टी आई में कई ट्रेड होतीं है कुछ एक साल की होती हैं कुछ दो साल की होती हैं   डीज़ल इंजिन मैकेनिक   , इलेक्ट्रिकल ,  वायरमैन , फिटर ,टर्नर, वेल्डर, कंप्यूटर ऑपरेटर   और प्रोग्राम सहायक , इलेक्ट्रॉनिक, सिलाई कढ़ाई , डिज़ाइन,  ड्राफ्टमैन , रेफ्रीजरेटर एंड एयर कोडिशनिंग ,  DTP ऑपरेटर,   इंटीरियर डेकोरेटर,      बागवानी  ,सेक्रेटियर प्रैक्टिस , डिप्लोमा इन फार्मेसी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सेल्स मैनेजमेंट आदि पाठ्यक्रम होते हैं।
आई टी आई में क्या पढ़ाया जाता है ---
आई टी आई एक वोकेशनल एजुकेशन है यानि एक व्यावसायिक शिक्षा है , सामान्यता आई टी आई पाठ्यक्रम में प्रैक्टिकल पर अधिक ध्यान दिया जाता है ,आई टी आई  में वही शिक्षा दी जाती है जो किसी उद्योग में किसी जूनियर इंजीनियर के निर्देश में आधारभूत कार्य के लिए जरुरी है । किसी उद्योग के लिए कुशल या स्किल्ड श्रमिकों की जरुरत पड़ती है ये स्किल्ड वर्कर और स्किलड स्टाफ़ आई टी आई से ही आते हैं यानि एक कुशल कर्मचारी आई टी आई  संस्थान से ही आ पाते हैं। आईटीआई में स्टूडेंट को जॉब और ट्रेड के अनुरूप स्किल्ड करने के लिए प्रैक्टिकल ज्ञान अधिक दिया जाता है। जैसे इलेक्ट्रिकल ट्रेड में इलेक्ट्रिक संबंधी जानकारी कि मोटर वाइंडिंग कैसे होती है , स्टार्टर क्या है , जेनेरेटर ,ट्रांसफॉर्मर , वायरिंग , विभिन्न बिजली के उपकरण के अंदर के पार्ट्स उनकी रक्षा और सञ्चालन के बारे में सिखाया जाता है। इसी तरह हर ट्रेड में उन बातों को बताया जाता है जो किसी उद्योग में उस तकनीकी कर्मचारी को जरुरत पड़ती है।
आई टी आई के बाद क्या करें---
आई टी आई के पाठ्यक्रम के बाद उसी ट्रेड के सम्बन्ध में विभिन्न संस्थानों से अप्रेन्टिस का विज्ञापन देखते रहना चाहिए , क्योंकि उसमे एडमिशन पाने के बाद वो  संस्थान एक निश्चित स्टाइपेंड  जो लगभग 
8500 रुपये महीने सरकार द्वारा निर्धारित है ,दिया जाता है
के बाद एक प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देगा , इसमें अभ्यर्थी से आठ से दस घण्टे तक का समय किसी औधोगिक इकाई या  संस्थान में देना पड़ता है  उसके एक वर्ष बाद प्रशिक्षु को की परीक्षा में बैठना पड़ता है   ये परीक्षा आल इण्डिया ट्रेड टेस्ट (AITT) करवाता है   जिसमे पास होने के बाद NCVT (national council of vocational training) का प्रमाणपत्र मिलता है।          और वो परीक्षा पास करनी पड़ती है। इस प्रमाणपत्र के बाद ही ITI को पूरा माना जाता है ,क्योंकि अपरेंटिस के बाद ही प्रशिक्षण के समय जो थ्योरी और थोडा प्रैक्टिकल ज्ञान प्राप्त किया था ,अब किसी बड़े संस्थान में व्यवहारिक ट्रेनिंग मिलती है जो न केवल प्रशिक्षु को बेहतर बनाती है बल्कि उसे काम करने में निपुणता आ जाती है।

 आई टी आई के बाद क्या करें--
आई टी आई के बाद कई स्कोप खुलते हैं ,कुछ स्टूडेंट पॉलिटेक्निक करने लगते है क्योंकि उन्हें सीधे दूसरे साल में एडमिशन मिल जाता है , कुछ स्टूडेंट CTI में      एडमिसन    ले लेते हैं जो ITI में इंस्ट्रक्टर बनने के लिए जरुरी योग्यता है यानि किसी सरकारी ITI या प्राइवेट ITI में पढ़ाने के लिए CTI का डिप्लोमा जरुरी है । CTI की भी एक परीक्षा होती है जो देश भर में कुछ संस्थानों से किया जा सकता है।
 ITI के बाद खुद अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं ,
आईटीआई के बाद रेलवे के इलेक्ट्रीशियन ,फिटर ,आदि पद , लोको पायलट के लिए आवेदन कर सकते हो । डिफेन्स   में इलेक्ट्रीशियन आदि के पद आते हैं वहाँ पर फॉर्म अप्लाई कर सकते हैं   विद्युत् विभाग में , BSNL, GAIL,BHEL, SAIL, PWD , डीज़ल लोकोमोटिव मडुवाडीह वाराणसी , रेल कोच फैक्ट्री रे बरेली ,रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला  जैसे संस्थानो  में ITI के ट्रेड्स के अनुसार vacancy  आती हैं । विभिन्न AIIMS में इलेक्ट्रीशियन आदि की जगह आती हैं। HAL में ,NTPC में , हर ITI ट्रेड के अनुसार जगह आती ही रहती हैं ,इसके लिए रोजगार की साइट्स ,रोजगार समाचार और विभिन्न दैनिक पेपर में रोजगार के विज्ञापन देखते रहना चाहिये।

 आई टी आई की कुछ ट्रेड्स की जानकारी।---

स्टेनोग्राफी एंड सेक्रेट्रिअल प्रैक्टिस---
 इस ट्रेड की अवधि एक साल की होती है इसमें हिंदी और इंग्लिश टाइपिंग साथ में शॉर्टहैंड लिपि की ट्रेनिंग दी जाती है ,  स्कोप -इस कोर्स को करने के बाद कोर्ट में स्टेनोग्राफर या फिर सचिवालय में विभिन्न अधिकारियों के साथ एक स्टेनोग्राफर होता हैं ,इन पदों को भरने के लिए SSC से स्टेनोग्राफर की पोस्ट विज्ञापित होती हैं।
 इलेक्ट्रीशियन--
इस कोर्स की अवधि दो वर्ष की होती है ,इस कोर्स को करने के बाद और अप्रेन्टिस करने के बाद ,रेल ,NTPC, BHEL,HAL, HINDALCO,NALCO, तथा डिफेन्स, और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों में जॉब पाया जा सकता है।
डीजल मकैनिक--
इस ट्रेड से सर्टिफिकेट लेने के बाद रोडवेज ,रेलवे , नगरनिगम में अपप्रेन्टिस के बाद जॉब पाया जा सकता है। इसके अलावा बड़े बड़े माल, और TATA ,ऑटोमोबाइल कंपनियों में जॉब पाया जा सकता है।
फिटर -
इस दो साल के कोर्स करने के बाद विभिन्न फैक्टरियों में ,BHEL ,GAIL, SAIL में मसीनिस्ट की जॉब पाई जा सकती है।
 इंटीरियर डेकोरेटर--
ये कोर्स महिलाओं के लिए लाभदायक है इस कोर्स को करने के बाद महिलाये किसी अच्छे इंटीरियर डिज़ाइनर के साथ असिस्ट कर सकतीं हैं।
 DTP ऑपरेटर -
इस कोर्स में एडिटिंग ,वीडियो बनाना ,बैनर, पब्लिशिंग की बातें ट्रेनिंग में बताई जातीं है ,इस कोर्स को करने के बाद स्कोप ,किसी न्यूज़ पेपर तथा TV में जॉब मिल जाता है।

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