औरंगजेब के पवेलियन और बादशाही बाग़

औरंगजेब की पवेलियन व बदशाहीबाग

      ये ऐतिहासिक स्थल कानपुर उत्तर प्रदेश के बगल में सटे फतेहपुर जनपद में है , ये स्थल खजुआ नामक एक छोटे से क़स्बे में है ,इस क़स्बे की स्थिति मुग़ल रोड में है ,मुग़ल रोड आगरा से  आज के प्रयागराज या  इलाहाबाद (allahabaad) तक है, इतिहास में नज़र दौड़ाएं तो शाहजहाँ के समय ये एक सराय स्थल था ,यहां पर सेनाएं जब आगरा से चलतीं थी तो यहीं आकर  विश्राम करतीं थी , लश्कर के साथ घोड़े , हांथी होते थे जो यहां चारा और पानी के लिए रुकते थे ,पास में ही सैनिकों के रहने,ठहरने  के लिए, रुकने के लिए एक किले के अंदर कई कमरे बने हैं ।
    ये किलेनुमा परिसर के अंदर बन्द संरचनाएँ है जब आप मुग़ल रोड से इस क़स्बे में प्रवेश करते है तो दोनों तरफ चारमीनार जैसे दो ऊँचे विशाल दरवाजे मिलते है ,जो किले के प्रवेश द्वार थे। इस समय ये बिल्डिंग जीर्ण शीर्ण हो रही है ,पुरातत्व विभाग ने संरक्षण का कार्य लगातार किया है और अब भी जारी है इसलिए ये धरोहर अभी भी दिख रही है।
    इतिहास में नजऱ दौड़ाएं तो ये खजुआ स्थल का नाम भी आपको मिलता है ,जब शाहजहाँ की बृद्धा वस्था और बिमारी की सूचना मुगलिया सल्तनत में फैली, साथ में ये भी अफ़वाह फैली की शाहजहाँ ने अपना उत्तराधिकारी दाराशिकोह को बना दिया है क्योंकि शाहजहाँ अपने पुत्रों में दाराशिकोह को सबसे अधिक योग्य और राज सिंघासन के लिए उपयुक्त मानते थे, उस समय औरंगजेब दक्षिण के सूबे औरंगाबाद का सूबेदार था ,खबर सुनते ही उसने उत्तर की तरफ बढ़ना शुरू किया ,और अपने भाइयों के साथ उत्तराधिकार का युद्ध कर उन सब को पराजित किया ,तथा शाहजहाँ को आगरे के किले में बन्दी बना दिया। 
      औरंगजेब ने 1658 को अपना राजतिलक आगरा में किया।
      उत्तराधिकार के युद्ध में तीन भाइयो से हुआ जो अलग अलग स्थल में लड़े गए ,एक भाई  शाह शुजा से युद्ध इसी खजुआ के मैदान में हुआ , शाह शुजा हार  गया और बंगाल भाग गया।
     ये कहानी है इस स्थान की।

        

Post a Comment

0 Comments