Arun Jaitly|अरुण जेटली|Biography
भाजपा के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है क्योंकि उनके जैसा संकटमोचन नेता भाजपा में मिलना मुश्किल है । अभी बीजेपी एक माह पहले पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन के शोक से उभर नही पाई थी कि ये दूसरा बड़ा झटका था क्योंकि ये दोनों नेता 67-68 साल की उम्र में ही स्वर्ग सिधार गए , दोनों की जरूरत थी बीजेपी और देश को उनके नेतृत्व शैली, वक्तृता शैली , राष्ट्रभक्ति के लिए ।
अरुण जेटली जी का राजनीतिक सफ़र----
25 जून 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गए का विरोध करने के कारण उन्हें 19 महीने जेल में बन्द रहना पड़ा ,जेल के जिस सेल में अरुण जेटली को रखा गया उसमे अटल बिहारी बाजपेई और लाल कृष्ण आडवाणी भी बन्द थे , जेल से छूटने के बाद वो जनसंघ में सम्मिलित हुए । 1980 में जेटली जी ने दिल्ली हाइकोर्ट में वकालत करने लगे और कुछ साल वकालत में आगे बढ़ते हुए मात्र 37 साल की उम्र में अडिशनल सोलिस्टर जनरल बनाये गए,1982 में उनका विवाह कश्मीर के राजघराने से ताल्लुक रखने वाले गिरधारी लाल डोंगरा की पुत्री संगीता से हुआ । गिरधारी लाल डोंगरा 25 साल तक शेख अब्दुल्ला सरकार में वित्त मंत्री रहे थे ,वो अपनी पत्नी का बहुत अधिक सम्मान करते थे ,उनके एक बेटा रोहन और एक बेटी सोनाली है जो परिवारवाद की राजनीति के दौर में कभी राजनीति में आने का प्रयास नही किया ,अरुण जेटली 1999 के आमचुनाव के पहले वो भाजपा के प्रवक्ता रहे ।अरुण जेटली का वकालत का अनुभव---------
अरुण जेटली ने 1977 में वकालत की शुरुआत की , उन्होंने देश भर के कई हाइकोर्ट में वकालत की ,सुप्रीम कोर्ट में वकालत की ,1989 में वी पी सिंह सरकार ने सोलिस्टर जनरल नियुक्त किया ,उनको 1990 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया ,बोफोर्स घोटाले के सुनवाई के लिए कागजी कार्यवाही को पूरा किया ,आप लालकृष्ण आडवाणी,शरद यादव और माधवराव सिंधिया जैसे दिग्गज नेताओं के वकील रहे ,इन्होंने क़ानून पर कई लेख लिखे , जून 1988 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित हुए ,जहां उन्होंने ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कानूनों को मन्जूरी दी गई थी । 2004 में जेटली राजस्थान हाइकोर्ट में कोकाकोला के वकील के रूप में पेश हुए। मुकुल रोहतगी से उनकी अभिन्न मित्रता थी दोनों हाइकोर्ट में कभी कभी आमने सामने होते थे परंतु 1978 से 1998 तक दोनों लोग रोजाना साथ साथ लंच करते थे,उनके मित्रों में हरीश साल्वे, सोली जी सोहराब जी जैसे जाने माने वक़ील थे। अरुण जेटली किसी भी केस की सारी तैयारी ख़ुद करते थे क़ानूनी बारीकियों के साथ केस के तथ्यों को ख़ुद तैयार करते थे और स्वयं पेज का एक एक पन्ना पढ़कर नोट्स तैयार करते थे, वह बहस के दौरान ख़ुद तैयारी करते थे जूनियर्स की मदद नही लेते थे। संवैधानिक विषयो में उनकी गहन पकड़ थी । वो देश के सबसे हाई टैक्स पेयी वकील थे ,उनकी एक दिन की वकालत से कमाई लगभग एक करोङ रुपये थी । उन्होंने एक बार राजस्थान में अपनी ही भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ में मुकदमा लड़ा।अरुण जेटली और संसद-----
जेटली जी को अटल जी की सरकार और नरेंद्र मोदी की सरकार में जो दायित्व मिले उन्हें इन्होंने सफलता पूर्वक निर्वहन किया , बाजपेई सरकार में विधि मंत्री रहते हुए इन्होंने ग्राम न्यायालय ,फ़ास्ट ट्रैक न्यायालयों और राज्यसभा में मतदान में सुधार जैसे महत्वपूर्ण क़दम उठाये,उन्होंने बाजपेई सरकार में विधि मंत्री ,कॉर्पोरेट मंत्री ,शिपिंग मंत्रालय भी संभाला ।
मोदी सरकार में वित्तमंत्री रहते हुए इन्होंने जनधन योजना ,मुद्रा योजना और जी .एस. टी. जैसे बड़े आर्थिक सुधार किये और आई बी सी जैसे क़ानून बनवाये, उन्होंने सदैव नए विचारों का स्वागत किया, विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद रखना और नेताओं से सम्बन्ध रखना जेटली के कार्यशैली की विशेष ख़ासियत थी। संसद में इनके द्वारा दिए गए कई भाषण सहजने योग्य है ,वो संसद में जटिल क़ानूनी विषय को सरल ढ़ंग से समझा देते थे जो उनके संवाद प्रिय व्यक्तित्व को दिखाता है।
अरुण जेटली अपने सहयोगियों के साथ मिलकर संसद में वाम बुद्धि जीवियों और कांग्रेसियो को अपने तार्किक संवाद से पस्त किया क्योंकि अभी तक भाजपा को वामदल और कांग्रेस ने कम्यूनल कहकर घेर रखा था। अरुण जेटली पर सात बिंदुओं पर उनके कार्यों को और अधिक प्रभावी रूप से प्रस्तुत कर रहे है। जैसे जी एस टी पर , क्रिकेट प्रशासन पर , उनके पद्म विभूषण सम्मान के बारे में और अधिक जानेंगे।1. 'जीएसटी (GST) के शिल्पकार' और 450 घंटे की बैठकें
अरुण जेटली जी को आधुनिक भारत के कर सुधारों का जनक माना जाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि GST को लागू करने के लिए उन्होंने GST काउंसिल की बैठकों की अध्यक्षता करते हुए 450 घंटे से भी अधिक समय चर्चाओं में बिताया था। उनकी विशेषता यह थी कि उन्होंने कभी भी 'बहुमत' से निर्णय नहीं लिया, बल्कि हर फैसला 'सर्वसम्मति' (Consensus) से कराया, ताकि विपक्ष शासित राज्यों को भी साथ रखा जा सके।
2. 1991 के आर्थिक सुधारों की कानूनी नींव
1991 में जब नरसिम्हा राव सरकार ने एलपीजी (LPG - उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) मॉडल अपनाया था, तब अरुण जेटली जी ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में सरकार को कई जटिल कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने में मदद की थी, ताकि विदेशी निवेश के रास्ते साफ हो सकें।
3. 'सेंट्रल हॉल' के सबसे प्रिय नेता
संसद का 'सेंट्रल हॉल' भारतीय राजनीति का वह स्थान है जहाँ सभी दलों के नेता अनौपचारिक रूप से मिलते हैं। जेटली जी वहां के निर्विवाद राजा थे। उनकी मेज पर सत्ता पक्ष से लेकर कट्टर विपक्षी (जैसे सीताराम येचुरी या गुलाम नबी आजाद) तक बैठकर लंच करते थे। उन्हें "पुल बनाने वाला नेता" कहा जाता था, जो डेडलॉक को सुलझाने में माहिर थे।
4. क्रिकेट प्रशासन में सुधार और 'DDCA' का कायाकल्प
जेटली जी केवल क्रिकेट प्रेमी नहीं थे, बल्कि एक कुशल प्रशासक भी थे। उन्होंने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम (अब अरुण जेटली स्टेडियम) का आधुनिक निर्माण कराया। उन्होंने ही वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों को शुरुआती दौर में पहचाना और प्रोत्साहित किया।
5. किताबों और कलम के प्रति प्रेम
वे न केवल प्रखर वक्ता थे, बल्कि एक शानदार लेखक भी थे। वे अक्सर 'पार्कर' और 'मोंट ब्लांक' जैसे खास पेन इस्तेमाल करते थे। उनके पास दिल्ली और विलायती किताबों का एक विशाल संग्रह था। वे अक्सर विदेशी दौरों से लौटते समय सूटकेस भरकर किताबें लाते थे।
6. परिवार और शिक्षा के प्रति विचार
जैसा कि आपने उल्लेख किया कि उनके बच्चों ने राजनीति में प्रवेश नहीं किया; जेटली जी का मानना था कि बच्चों को अपनी योग्यता के दम पर अपना करियर बनाना चाहिए। उनके बेटे रोहन जेटली वर्तमान में अपनी कानूनी विरासत को संभाल रहे हैं और DDCA के अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय हैं।
7. 'पद्म विभूषण' सम्मान
उनकी मृत्यु के पश्चात, भारत सरकार ने वर्ष 2020 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' (मरणोपरांत) से सम्मानित किया, जो उनके सार्वजनिक जीवन में दिए गए अद्वितीय योगदान का प्रतीक है।
वो सिर्फ एक बार 2014 अमृतसर से लोकसभा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए वो हर बार राज्यसभा से चुने गए ,2009 में वो राज्यसभा से विपक्ष के नेता चुने गए ,2019 के चुनाव में लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान की जम्मेदारी जेटली को सौंपी गई थी ,बिहार में नितीशकुमार के साथ गठजोड़ में इनकी अहम भूमिका थी , यही इनकी खूबी थी कि वो अन्य पार्टियों के नेताओं से से तालमेल बना कर रखने वाले मध्यममार्गीय शैली अपनाने वाले नेता थे। भले ही संसद में वो विरोधी दलों के नेताओं को कठघरे में खड़ा करने में कोई कोर कसर न छोड़ते हों पर जब व्यक्तिगत मित्रता की बात आती थी तो वो अपने विपक्षी दलों के मित्रों के साथ खड़े दीखते थे।
अरुण जेटली को कपडे पहनने का बहुत शौक था वो , कहीं बहार जाने पर कई ड्रेस साथ लेकर जाते थे ,खाने का उनको बहुत ज्यादा शौक था ,वो दिल्ली में हर प्रकार के डिश के लिए प्रसिद्ध रेस्टोरेंट को जानते थे ,उनको पुराने गाने सुनने का बहुत ज्यादा शौक था, उनको साहिल लुधियानवी के लिखे गीत बहुत पसंद थे,गोपाल दास नीरज की कविताये जबानी याद थीं ,वो किसी बात को किस्से कहानियों के माध्यम से समझ देते थे किस्से सुनाने का शौक था , क्रिकेट का ज़्यादा शौक था ,वो ब्लॉग ट्विटर में लगातार लिखकर अपने और पार्टी के विचार प्रकट करते रहते थे जन संवाद कायम रखते थे ,जब वो किडनी के ट्रांसप्लांट के समय सबसे अलग अस्पताल में थे तब भी ब्लॉग लिखते थे या फिर अमेरिका में अपने कैंसर की बीमारी के लिए भर्ती होते हुऐ भी ब्लॉग ट्वीटर में लिखकर विपक्षियों को जवाब देते रहते थे। इस तरह वो बहुआयामी प्रतिभाशाली व्यक्ति थे।
25 अगस्त 2019 को निगमबोध घाट में 3:30 बजे उनका अंतिम संस्कार हुआ। बीजेपी का हर कैडर का नेता उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू ,लोकसभा अध्यक्ष ॐ जी बिरला , रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ,नितिन गडकरी , पियूष गोयल ,जे प पी नड्डा,मुख्तार अब्बास नकवी , मनोज तिवारी सभी ने अरुण जेटली को अंतिम विदाई दी बड़ा नेता हो या छोटा सभी के आँखों में आँशु थे अपने प्रिय संगठनकर्ता , महान नेता के बिछुड़ने के कारण छोटा हो या बड़ा सभी स्तब्ध थे ,जब उनके बेटे रोहन ने जब उनको मुखाग्नि दी तब सभी के आँखों में आंसू थे ,अरुण जेटली जी ने चार दशक तक राजनीति के मटमैले पन को उन्होने खुद को छूने नही दिया। दोस्तों के लिए हमेशा खड़े रहने वाले व्यक्तिव के बारे में जितना भी कहा जाए कम है।
इस प्रकार आज हमारे बीच से हर घटना के ,हर पहलू को देखने और उसको समझाने की क्षमता रखने वाले संवाद के कुशल खिलाड़ी ,सौम्य ,व्यक्तिव के धनी, तीक्ष्ण स्मरणशक्ति ,प्रखर मेधा के धनी ,अरुण जेटली हमारे बीच में नही रहे पर उनकी हर कार्यशैली को देश अनुसरण करेगा। आगे देश के लिए तैयार होने वाले नेता उनसे बहुत कुछ सीखेंगे ।

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