Full form of ED

E D का full form--

Directorate General of Economic Enforce ment) आर्थिक प्रवर्तन महानिदेशक--यह संस्थान जी स्थापना एक मई 1956 को आर्थिक कार्य विभाग में प्रवर्तन इकाई के रूप में की गई  1957  में इस संस्थान का नाम बदलकर प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate ) कर दिया गया।
,यह विधि प्रवर्तन और आर्थिक आसूचना एजेंसी है जो भारत में आर्थिक कानून लागू करने और आर्थिक अपराध रोकने के लिए गठित की गई है,इस संगठन में भारतीय राजस्व सेवा,भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होते हैं। इस समय ये मुख्यता दो मुख्य अधिनियम जो वित्त अपराध को नियंत्रित करते है ये हैं विदेश विनिमय प्रबंधन अधिनियम1999 fema) और धन आशोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA)

Pipal ke pend se 24 hour oxygen kaise?

                         

          पीपल रात को भी ऑक्सीजन कैसे छोड़ता है!! 

         :: प्रकाश संश्लेषण के प्रकार ::                    प्रकाश संश्लेषण की क्रिया तीन तरह की होती है पहली C3 दूसरी C4 तीसरी CAM प्रकार की ।

पहले प्रकार में सामान्य पौधे आते है जो इस विधि से प्रकाश संश्लेषण करते है,               

              C A M प्रकार के प्रकाश संश्लेषण की विशेषतायें::-

            CAM प्रकार के प्रकाश संश्लेषण वाले पौधे या तो रेगिस्तानी पेंड़ में होता है या फिर  या  अधिपादप  पौधों में होता है ,अधिपादप वो बृक्ष या पादप  होते है जो दूसरे पेंड़ पर उनके तनों में भी उग आते हैं, कभी कभी पीपल का पेंड़ जिस पौधे का आश्रय लेकर उगता है  उसी पौधे को धीरे धीरे खत्म करके ख़ुद अपना विस्तार करता है इस प्रकार ये जरुरी नही कि जो पीपल का पेंड़ किसी दूसरे बृक्ष के साथ जुड़ा हुआ दिखाई दे वही अधिपादप के गुण रखता है बल्कि एक बड़ा पीपल का पेंड़ भी अधिपादप हो सकता है जो प्रारंभिक अवस्था में अपने साथ संयुगमित बृक्ष को सुखा दिया हो और ख़ुद विस्तारित हुआ हो, चूँकि  रेगिस्तान में पानी की कमी होती है अतः वहां के पेंड़ की रचना भी ऐसी होती है कि वो पानी का जरा भी  नुकसान नही होता,इसी प्रकार अधिपादप पेंड़ भी चूँकि दूसरे पेंड़ के डाल में ही उग आते है अतः उनके भी जड़ के बिना विकसित होने पर पानी की उपलब्धता कम होती है,आप लोंगों ने देखा होगा की कभी कभी किसी नीम के पेंड़ के साथ साथ पीपल भी जुड़ा होता है ये अधिपादप का कारण है पीपल पूरी तरह अधिपादप तो नही है क्योंकि इसके बीज यदि मिट्टी में पड़े होते है तो मिट्टी में भी उग आता है यदि किसी पेंड़ की सतह पर भी बीज गिर जाये पक्षियों के मल आदि द्वारा तो इसका विकास अधिपादप पौधे के रूप में हो जाता है। इस तरह पीपल को अर्ध अधिपादप (hemi epiphytic) कह सकते है , इस प्रकार पीपल के बीज अवस्था में अधिपादप या पूर्ण पादप के विकास के रास्ते तय होते  हैं। बीज अवस्था से जब पौध रूप में विकास होता है तो वह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है कि वो मिट्टी में विकसित होता है या दूसरे पौधे में ख़ुद को   आश्रय स्थल बनाता है । यदि मिट्टी में पीपल का पेंड़ उगता है तो सामान्य पौधे की तरह विकसित होता है यदि किसी दूसरे बृक्ष को आश्रय स्थल बनाता है तो वो अधिपादप पौधे की विशेषतायें लिए हुए विकसित होता है।
                CAM प्रकार के पौधों में पानी की क्षति बचाने के लिए दिन के समय नही खुलते क्योंकि रंध्र खुलने बंद होने से वाष्प निकल जाती है,रात के समय इस प्रकार के पौधे अपने रंध्र या stomata को खोलते है, आपको जानकारी हो की रंध्र या stomata पत्ती के

Stomata are found in back side of leaves ।
(रन्ध्र या स्टोमेटा)



 निचले सतह पर एक कपाट (वाल्व) की तरह होते है जो खुलने बंद होने वाले किवाड़ की तरह होते है इन्ही छिद्रों से पत्तियां कार्बन  डाइ ऑक्साइड  वातावरण से ग्रहण करतीं है और प्रकाश संश्लेषण की अभिक्रिया जो पत्ती के अंदर क्लोरोप्लास्ट के अंदर उपस्थित ग्रेना ( दो रुपयों के सिक्कों से बने बण्डल की तरह की संरचना) में  सम्पन्न होती है । प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में पत्तियों के अंदर पानी की तथा अवशोषित कॉर्बन डाई ऑक्साइड की प्रकाश और क्लोरोफ़िल  की उपस्थिति में   संश्लेषण होता है तो ग्लूकोज़(शर्करा) बनता है साथ में ऑक्सीजन के अनु भी निर्मित होते है । यही निर्मित  ऑक्सीजन को पत्तियां रंध्र से बहार वातावरण में निकालती रहतीं है।
            परंतु पीपल के पेंड़ में  जो  अधिपादप होते हैं , में  पत्तियां पानी बचाने के लिए दिन में बार बार stomata या रंध्र को नही खोलतीं बल्कि कुछ समय के लिए खोलकर कार्बन  डाई ऑक्साइड  को malate( मैलेट) के रूप में  संगृहीत कर लेते है , पीपल का ये अधिपादप पौधा, रात को जब सूर्य का प्रकाश नही भी होता तब भी ये इकट्ठे किये गए malate को तोड़कर ऑक्सीजन छोड़ते है इस तरह ये प्रक्रिया रात भर भी चलती है और पीपल का अधिपादप पेंड़ रात भर ऑक्सीजन छोड़ता रहता है ,।इस तरह अपनी इसी विशेषता के कारण पीपल कुछ तो अलग है।
               पीपल के आलावा जो भी पेंड़ दूसरे पेंड़ पर अकस्मात् उग आते है और जो रेगिस्तानी इलाके में उगतें है वो भी रात को ऑक्सीजन  छोड़तें है।
               इस तरह ये समझा जा सकता है कि मिट्टी में उगने बढ़ने वाले पीपल के पेड़ 24 घण्टे ऑक्सीजन  नही  छोड़ते बल्कि सिर्फ़ वही पेंड़ रात भर ऑक्सीजन  छोड़तें है जो अधिपादप पीपल होते है ,     प्रारंभिकचूँ। अवस्था में  कभी कभी  दूसरे  नीम ,बबूल, आम के पौधे के साथ भी पीपल उग जाता है और उस नीम, बबूल, आम आदि के पौधे को पूरी तरह सुखा देता है और ख़ुद एक पूर्ण परिपक्व पीपल का पेंड़ बन जाता है ,इस प्रकार के पेंड़ जिसमे किसी  दूसरे बृक्ष का  आश्रय नही भी दिखता वो भी   अधिपादप पेंड़ होता है और 24  घण्टे  oxygon देता है  , कभी कभी बीज में ही अधिपादप के गुण विद्यमान होते है अतः सामान्य पीपल पेंड़  थोडा बहुत सामान्य पेंड़ के रूप में malate बनाकर कार्बन डाइ ऑक्साइड को रात में छोड़ता है ,परंतु  ये  सूर्यास्त के चार पांच घण्टे बाद तक ही  ऑक्सिजन  देता है ,रात   आक्सिजन नही देता।
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