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Physics Wallah (PW) और अलख पाण्डेय की सफलता की कहानी: कम फीस में JEE-NEET की बेहतरीन तैयारी कैसे संभव हुई?

  ​"सफलता रातों-रात नहीं मिलती, बल्कि यह सालों के कड़े संघर्ष और अटूट संकल्प का परिणाम होती है। आज जब हम भारतीय शिक्षा जगत में एक 'क्रांति' की बात करते हैं, तो हमारे सामने एक ऐसे शिक्षक का चेहरा आता है जिसने साइकिल से कोचिंग जाने से लेकर देश के सबसे बड़े एड-टेक (Ed-tech) साम्राज्य 'फिजिक्स वाला' के निर्माण तक का सफर तय किया। यह कहानी केवल एक शिक्षक की नहीं, बल्कि उस जिद की है जिसने शिक्षा को व्यापार से ऊपर उठाकर हर गरीब छात्र के लिए सुलभ बना दिया।यह महान कार्य इसलिए करने में सफल हुए क्योंकि अलखपांडेय ने गरीबी को नजदीक से देखा था।उन्होंने देखा कि कैसे एक गरीब और मध्यमवर्ग का बच्चा बड़े बड़े  कोचिंग संस्थाओं में एडमिशन उनकी ज्यादा फीस होने के कारण नहीं ले पाते वो होनहार मेधावी होते है पर कोचिंग करने के लिए उनके पास यथा अनुरूप पैसे नहीं होते।        अलख पांडे ने गरीब बच्चों को सस्ती और अच्छी शिक्षा देने के उद्देश्य से ही अपना सफर शुरू किया था। उन्होंने बी.टेक इसलिए छोड़ी क्योंकि उनका मन पढ़ाई से ज्यादा पढ़ाने (टीचिंग) में लगता था और वह कॉलेज की पढ़ाई से संतु...

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए अगले दिन उछाल वाले शेयर कैसे पहचानें? – एक व्यावहारिक गाइड

 ब्लॉग लेख:


इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए अगले दिन उछाल वाले शेयर कैसे पहचानें? – एक व्यावहारिक गाइड

कल कौन सा शेयर इंट्राडे में अचानक बढ़ेगा, यह सटीक रूप से पहचानना बहुत ही कठिन कार्य है क्योंकि शेयर बाजार की चाल कई कारकों पर निर्भर करती है। फिर भी कुछ तकनीकी और विश्लेषणात्मक तरीकों की मदद से हम संभावनाओं का अनुमान लगा सकते हैं कि कौन-से स्टॉक्स अगले दिन अच्छी चाल दिखा सकते हैं।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि किस तरह से पिछले दिन का डेटा, तकनीकी संकेतक, समाचार और सेक्टर ट्रेंड्स का विश्लेषण कर आप संभावित तेज़ी वाले स्टॉक्स की पहचान कर सकते हैं।

आप शेयर बाजार में अच्छी जानकारी के लिए बेंजामिन ग्राहम की बुक इंटेलिजेंट इन्वेस्टर बेंजामिन ग्राहम की बुक इंटेलिजेंट इन्वेस्टर हिंदी एडिशन में पढ़ सकते हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए अगले दिन उछाल वाले शेयर कैसे पहचानें? – एक व्यावहारिक गाइड



🔍 1. पिछले दिन के प्रदर्शन का विश्लेषण (Previous Day’s Performance Analysis)

◾ टॉप गेनर्स और लूज़र्स पर नज़र डालें

NSE या BSE की वेबसाइट पर टॉप गेनर्स और लूज़र्स की सूची देखकर ऐसे स्टॉक्स की पहचान करें, जिनमें पहले से तेज़ चाल देखी गई हो। इनमें अगले दिन भी मोमेंटम जारी रह सकता है।

◾ वॉल्यूम शॉकर्स (Volume Shockers)

वह स्टॉक्स देखें जिनमें सामान्य से अधिक वॉल्यूम दर्ज हुआ हो। इससे यह संकेत मिलता है कि वहां निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, जो अगले दिन की चाल का आधार बन सकता है।

◾ क्लोजिंग प्राइस का महत्व

अगर कोई स्टॉक अपने दिन के उच्चतम (High) या न्यूनतम (Low) स्तर के पास बंद हुआ है, और उसमें अच्छा वॉल्यूम भी है, तो अगले दिन भी वह ट्रेंड जारी रख सकता है।


📈 2. तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) के संकेत

◾ सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

किसी स्टॉक के चार्ट पर सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल पहचानें। अगर कोई स्टॉक रेजिस्टेंस को तोड़ने की स्थिति में है, तो वह अगले दिन ब्रेकआउट दे सकता है।

◾ ब्रेकआउट स्टॉक्स

ऐसे स्टॉक्स पर नज़र रखें जो कंसोलिडेशन फेज़ से निकलने वाले हों। वॉल्यूम के साथ ब्रेकआउट एक मजबूत संकेत होता है।

◾ कैंडलस्टिक पैटर्न्स

बुलिश एंगलफिंग, हैमर, मॉर्निंग स्टार जैसे पैटर्न संभावित रिवर्सल और अगली तेजी का संकेत देते हैं।

◾ मूविंग एवरेज क्रॉसओवर

9-दिवसीय EMA का 50-दिवसीय EMA के ऊपर जाना (गोल्डन क्रॉस) एक तेज़ी का संकेत माना जाता है।

◾ मोमेंटम और वॉल्यूम इंडिकेटर

RSI, MACD, OBV जैसे टूल्स से यह पता चलता है कि किसी स्टॉक में खरीदारी का दबाव कितना है और वह ओवरबॉट या ओवरसोल्ड है या नहीं।


📰 3. फंडामेंटल और समाचार आधारित विश्लेषण

◾ कंपनी की ताज़ा घोषणाएं

कमाई की रिपोर्ट, कॉन्ट्रैक्ट जीतना, मर्जर या कोई अन्य बड़ी खबर आने वाले दिन की तेज़ चाल का संकेत दे सकती है।

◾ सेक्टोरल ट्रेंड्स

पूरे सेक्टर का प्रदर्शन भी ज़रूरी है। कभी-कभी पूरा सेक्टर ही बुलिश हो जाता है, जिससे संबंधित कंपनियों के स्टॉक्स में उछाल आता है।

◾ मैक्रोइकोनॉमिक इवेंट्स

ब्याज दरों में बदलाव, बजट घोषणाएं, या वैश्विक बाज़ारों की चाल भी भारत के स्टॉक्स को प्रभावित कर सकती हैं।

◾ प्री-मार्केट एनालिसिस

सुबह 9:00 से 9:15 के बीच NSE/BSE के प्री-ओपन सेशन में शेयर की कीमतों और वॉल्यूम का आकलन करें, जो दिन की संभावित दिशा बता सकता है।


⚠️ 4. ट्रेडिंग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

✅ लिक्विड शेयर चुनें

हमेशा ऐसे शेयरों को चुनें जिनमें अधिक वॉल्यूम और लिक्विडिटी हो ताकि एंट्री और एग्जिट में आसानी हो।

✅ स्टॉप-लॉस का प्रयोग करें

इंट्राडे ट्रेडिंग में जोखिम अधिक होता है, इसलिए हमेशा स्टॉप-लॉस लगाएं।

✅ अत्यधिक अस्थिर शेयरों से बचें

बहुत अधिक वोलाटाइल स्टॉक्स में अचानक बड़ा नुकसान हो सकता है।

✅ भावनाओं को काबू में रखें

डर और लालच के बजाय नियम आधारित ट्रेडिंग रणनीति अपनाएं।


🧠 अतिरिक्त सुझाव: स्कैनर और स्क्रीनर का प्रयोग करें

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे TradingView, Chartink, Screener.in पर उपलब्ध इंट्राडे स्क्रीनर का इस्तेमाल करके आप ब्रेकआउट या हाई वॉल्यूम स्टॉक्स की पहचान कर सकते हैं।

नोट :इसे भी पढ़ें:आप इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए अति आवश्यक पैरामीटर जिसका नाम OI है जाने इस ब्लॉग लेख से इसे भी पढ़ें क्लिक करें OI क्या है ,इंट्राडे ट्रेडिंग में महत्व


✍️ निष्कर्ष

शेयर बाज़ार एक जटिल और गतिशील प्रणाली है, जिसमें कोई भी तरीका 100% निश्चित नहीं होता। लेकिन यदि आप सही विश्लेषणात्मक टूल्स, तकनीकी संकेतक और समाचार स्रोतों का उपयोग करते हैं तो आप संभावित उछाल वाले स्टॉक्स की बेहतर पहचान कर सकते हैं। अनुशासन, अनुभव और सतत अध्ययन ही इंट्राडे ट्रेडिंग में सफलता की कुंजी हैं।


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