धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री : बागेश्वर धाम सरकार की दिव्य गाथा
बागेश्वर धाम के चमत्कारी शक्तियों का रहस्य
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री स्वयं को एक साधारण मानव बताते हैं, और कहते हैं कि उनके द्वारा जो भी चमत्कार दिखते हैं, वे बागेश्वर धाम सरकार अर्थात श्री बागेश्वर बालाजी (हनुमान जी) की सिद्धियों का प्रत्यक्ष प्रभाव हैं। उनका विश्वास है कि वे केवल एक माध्यम हैं, चमत्कारों के वास्तविक कर्ता हनुमान जी हैं। आज के समय में धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री एक सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु के रूप में उभरे हैं जिनकी कथा सुनने लाखों लोग आते हैं। मैने खुद जब एक बार बागेश्वर धाम की यात्रा के लिए कानपुर से खजुराहो के लिए ट्रेन में बैठा तो ट्रेन में खड़े होकर ही यात्रा करनी पड़ी क्योंकि ट्रेन में बैठने की जगह ही नहीं थी ,जब खजुराहो स्टेशन उतरा तो लोगों का रेला पूरा का पूरा ट्रेन से उतर गया और प्लेटफॉर्म में कुंभ मेला जैसा दृश्य दिखने लगा। खजुराहो स्टेशन से बीस किलोमीटर दूर गढ़ा ग्राम पहुंचा तो पूरा गांव सैकड़ों दुकानों से घिरा था वहां से करीब दो किलोमीटर दूर बागेश्वर धाम मुख्य मंदिर पहुंचा।
Dheerendra Krishna Shastri का नाम सन 2023 में तब भारत मे और पूरे विश्व मे विख्यात हुआ जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के द्वारा नागपुर में कथावाचन का कार्यक्रम हो रहा था इस दौरान महाराष्ट्र की एक संस्था अंध श्रद्धा उन्मूलन समिति के श्याम मानव उनके द्वारा किये जाने वाले चमत्कारों को अंधविश्वास बताया और उनके कार्यो को समाज मे अंधविश्वास बढ़ाने का आरोप लगाया। लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को बागेश्वर धाम सरकार के नाम से भी संबोधित करते हैं। मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित बागेश्वर धाम की महिमा आज देश विदेश में फैली हुई है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की चमत्कारी शक्तियों के कारण लोंगो के बीच ये बात प्रचलित है कि बाबा धीरेंद्र शास्त्री हनुमान जी के अवतार हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बचपन (Childhood of Dhirendra Shastri)
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्म मध्यप्रदेश के जिले छतरपुर के ग्राम गढ़ा में 4 जुलाई 1996 में हिन्दु सरयूपारीण ब्राम्हण परिवार में हुआ था ,इनका गोत्र गर्ग है और ये सरयूपारीण ब्राम्हण है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के पिता का नाम रामकृपाल गर्ग है व माता का नाम सरोज गर्ग है जो एक गृहणी है।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक छोटा भाई भी है व एक छोटी बहन भी है।छोटे भाई का नाम शालिग्राम गर्ग है वहीं इनकी छोटी बहन का नाम रीता गर्ग है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बाबा जी/दादा जी का नाम। भगवान दास गर्ग था। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बचपन अत्यधिक अभावों और गरीबी में गुजरा उन्होंने जीविकोपार्जन के लिए गली गली रामचरित मानस की चौपाइयों को सुनकर भिक्षा माँगकर जीवन व्यतीत किया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की शिक्षा---(Education of Dheerendra krishna Shastri)
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बचपन गढ़ा में व्यतीत हुआ ,वह बचपन से ही अपने दादा भगवान दास गर्ग से प्रभावित थे ,भगवान दास जब कथा वाचन करते थे तब धीरेंद्र शास्त्री बहुत ध्यानपूर्वक सुनकर उन कथा को कंठस्थ कर लेते थे तब उनकी उम्र मात्र 9 वर्ष थी ,धीरेंद्र शास्त्री ने आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए अपने दादा श्री से दीक्षा ग्रहण की। बाद में प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने गांव गढ़ा के सरकारी स्कूल में ही ग्रहण की ,बाद में यहीं से 12 वीं तक कि शिक्षा ग्रहण की ,उसके बाद B.A.छतरपुर से किया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री और बागेश्वर धाम--(Dheerendra Krishna Shastri and Bageshwar Dham)
धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में बागेश्वर धाम सरकार के मुखिया और पीठाधीश्वर हैं , वह इस दरबार के मुख्य प्रबंधक हैं। जैसा बताया जा चुका है कि बागेश्वर धाम मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा नामक गाँव मे स्थित है , इस स्थान पर ही धीरेंद्र शास्त्री जी एक दिव्य दरबार का आयोजन करते हैं और इस दिव्य दरबार मे देश के दूर दूर जगहों से लोग उपस्थित होते है जिनको कोई न कोई आर्थिक ,सामाजिक ,शारीरिक ,मानसिक परेशानी है और पीड़ित लोग अपने कष्ट निवारण के लिए दिव्य दरबार मे अपनी अर्जी लगाते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार बागेश्वर धाम में हनुमान जी मूर्ति स्वयंभू है जिनकी पूजा का प्रारंभ करीब 300 साल पहले हुआ इनके पूर्वजों ने मानव कल्याण के लिए बालाजी में दरबार की शुरुआत की थी, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तीन पीढ़ियों से बागेश्वर धाम में दरबार लगाते आये हैं।अब अपने दादा के बाद पिता जी दरबार लगाते थे अब धीरेंद्र शास्त्री बागेश्वर धाम में दिव्य दरबार लगाते हैं। बागेश्वर धाम में बालाजी हनुमान की मूर्ति विराजमान है,और यही बागेश्वर धाम की चमत्कारी शक्ति प्रदाता हैं। क्योंकि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री स्वयं कहते है कि वो एक साधारण मनुष्य ही हैं पर जो भी धीरेन्द्र शास्त्री का चमत्कार लोगों को दिखता है वह बागेश्वर हनुमान जी की सिद्धियां है जो बागेश्वर धाम के पीठासीन होने के कारण उनके द्वारा प्रकट होती हैं। यही बागेश्वर धाम का इतिहास है।"यदि हम बागेश्वर धाम का इतिहास देखें, तो पता चलता है कि यह स्थान वर्षों से तपस्या और जनसेवा का केंद्र रहा है।"
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की नेटवर्थ और जीवनशैली
धीरेंद्र शास्त्री के पास केवल एक निजी मोटरसाइकिल है। उनकी प्रतिदिन की कमाई लगभग 9,000 रुपये है। इस हिसाब से वे करीब 3.5 लाख रुपये प्रतिमाह और लगभग 40 लाख रुपये वार्षिक कमाते हैं।
2025 में भी उनकी जीवनशैली सादगीपूर्ण बनी हुई है। वे अपनी कमाई का अधिकांश भाग सामाजिक सेवा कार्यों में लगा देते हैं। वह सामाजिक सेवा में अपने धाम से हर वर्ष तीन सौ कन्याओं का सामूहिक विवाह करते है और उन्हें दान स्वरूप उपहार भी देते है।उनके आश्रम में गरीबों वृद्ध विकलांगों के लिए निःशुल्क रसोई चलती रहती हैं।
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के प्रमुख सेवा कार्य
गरीब बेटियों के विवाह : धीरेंद्र शास्त्री हर वर्ष गरीब और बेसहारा बेटियों के लिए सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन कराते हैं।
अन्नपूर्णा रसोई सेवा : बागेश्वर धाम परिसर में प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए निःशुल्क भोजन और प्रसाद वितरण होता है।
कैंसर अस्पताल का निर्माण : उन्होंने 9 एकड़ भूमि खरीदी है, जहाँ अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से सौ बेड का कैंसर अस्पताल बन रहा है।
वैदिक अध्ययन केंद्र : भारतीय संस्कृति और वेद अध्ययन को बढ़ावा देने हेतु एक विशेष केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्यरत हैं।
हिंदू राष्ट्र निर्माण हेतु प्रयास : छतरपुर में विशाल पैदल मार्च कर हिंदू राष्ट्र की संकल्पना का समर्थन किया, जिसमें लाखों अनुयायी साथ रहे।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के चमत्कार पर विवाद का जन्म--
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अंतरराष्ट्रीय मीडिया के नजरों में तब आये जब नागपुर की एक संस्था जिसका नाम है "अखिल भारतीय अन्धविश्वाश निर्मूलन समिति" इस संस्था के अध्यक्ष का नाम श्याम मानव है ।इन्होंने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर एक अपराध करने का आरोप लगाया जब धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में कथा वाचन कर रहे थे श्याम मानव का आरोप था कि धीरेंद्र शास्त्री नागपुर में महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाये गए क़ानून " महाराष्ट्र अन्धविश्वाश और काला जादू उन्मूलन क़ानून" का उल्लंघन किया है।इस तरह धीरेन्द्र शास्त्री विवाद का जन्म हुआ।
इस आरोप के बदले में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कोई भी क़ानून का उल्लंघन नहीं हुआ ,उन्होंने श्याम मानव को उनके दिव्य दरबार मे उपस्थित होने का आमंत्रण भी दिया ,पर श्याम मानव उनके दिव्य दरबार मे उपस्थित ही नहीं हुए ,बाद में महाराष्ट्र की पुलिस ने 25 जनवरी 2023 श्याम मानव द्वारा दी गई तहरीर के छानबीन के बाद धीरेंद्र शास्त्री को क्लीन चिट दे दी, यह कहकर की धीरेंद्र शास्त्री जी ने महाराष्ट्र के क़ानून के उल्लंघन में श्याम मानव द्वारा पेश किए गए किसी भी साक्ष्य को सही नहीं पाया।
इसी विवाद के बाद 20 जनवरी 2023 को उनकी ख्याति इतनी ज़्यादा बढ़ चुकी थी कि उनके दरबार मे एक दिन में करीब 50 हज़ार लोग उपस्थित हुए ,चारो तरफ़ सोशल मीडिया प्लेटफार्म में धीरेंद्र शास्त्री जी के वीडियो ही दिखाई देने लगे।सोशल मीडिया पर अक्सर धीरेंद्र शास्त्री चमत्कार के वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिन्हें लेकर समाज में अलग-अलग मत हैं।"
बागेश्वर धाम सरकार की दिव्य एवं चमत्कारी शक्तियाँ--
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज करोड़ों भक्तों की आस्था के केंद्र हैं। भक्तों का मानना है कि उन्हें हनुमान जी और सन्यासी बाबा की विशेष कृपा प्राप्त है, जिसके माध्यम से वे 'दिव्य दरबार' में लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं।उनकी सबसे बड़ी विशेषता भक्तों के मन की बात को बिना बताए कागज पर लिख देना है। जिसे लोग उनकी अतींद्रिय दृष्टि (Intuition) और हनुमान जी का चमत्कार मानते हैं। वे बिना किसी पूर्व परिचय के व्यक्ति का नाम, उसके परिवार का विवरण और उसकी समस्या का सटीक वर्णन कर देते हैं। भक्तों का अटूट विश्वास है कि धाम की 'पेशी' करने और वहां की भभूत से असाध्य रोगों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है। यह शक्तियां केवल चमत्कार नहीं, बल्कि सनातन धर्म की साधना और भक्ति की पराकाष्ठा का प्रतीक मानी जाती हैं।
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और साईं बाबा विवाद
31 मार्च 2023 को धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान से उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया ,जब जबलपुर में लगे उनके दरबार मे उपस्थित भक्त ने एक प्रश्न किया कि क्या सनातन साँई की पूजा को नकारता है हमारे धर्म के शंकराचार्य ने साईं को देवताओं में स्थान नहीं दिया। इस प्रश्न के उत्तर में धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने उत्तर दिया कि जिस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास ,सूरदास और अन्य संत योगपुरुष ,कल्पपुरुष तो हो सकते हैं पर भगवान नहीं उसी प्रकार साईं एक फ़कीर या संत तो हो सकते हैं लेकिन भगवान नहीं हो सकते उन्होंने कहा कि मेरे इस वाक्य में कॉन्ट्रोवर्सी हो सकती है पर फिर भी कहना पड़ेगा उनका कहना था कि "गीदड़ के ऊपर शेर की खाल" शेर की खाल ओढ़ने से कोई शेर नही बन जाता। इस बात पर शिव सेना के नेता राहुल कनल ने उनके ऊपर FIR करवाने की बात कही। वहीं भू माता ब्रिगेट संस्था की तृप्ति देसाई ने भी धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री पर महाराष्ट्र में FIR करने की बात कही है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की हिंदू राष्ट्र पदयात्राएं
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जातिवाद को मिटाने और हिंदुओं को एकजुट करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण पदयात्राएं की हैं। उनकी सबसे प्रमुख यात्रा छतरपुर के गढ़ा गांव (बागेश्वर धाम) से ओरछा तक की 'हिंदू एकता पदयात्रा' रही है, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लगभग 160 किलोमीटर की इस यात्रा के माध्यम से उन्होंने 'छुआछूत छोड़ो, हिंदुओं को जोड़ो' का नारा दिया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में छोटी-बड़ी कई यात्राएं कीं, जहां वे गांवों और कस्बों में जाकर लोगों को सनातन संस्कृति से जुड़ने और भारत को संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति जागरूक करते रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बागेश्वर धाम आगमन और भूमि पूजन
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी 23 फरवरी 2025 को बागेश्वर धाम गढ़ा छतरपुर मध्यप्रदेश में सौ बेड के कैंसर हॉस्पिटल निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम में भाग लिया , इस अवसर पर विभिन्न संत जन जैसे रामभद्राचार्य ,साध्वी रितंभरा आदि मंच पर उपस्थित रहे,इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने बताया कि उनकी सरकार कैंसर उपचार के लिए हर जिले के अस्पताल में कैंसर का डे केयर यूनिट स्थापित करेगी जिससे कैंसर के दूसरे तीसरे स्टेज पर पहुंचने से पूर्व ही जांच पड़ताल से पता लग सके,मोदी जी ने हर जिले में डायलिसिस सेंटर स्थापित करने की बात भी बताई।साथ में वादा किया धीरेन्द्र शास्त्री से की उनके विवाह उत्सव के समय तथा कैंसर अस्पताल निर्माण के बाद भव्य उदघाटन में वह फिर से बागेश्वर धाम आएंगे।
बागेश्वर धाम कैंसर हॉस्पिटल निर्माण योजना:
अस्पताल का स्वरूप और सुविधाएं
यह अस्पताल अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा, जिसका लक्ष्य मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल की तर्ज पर विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध कराना है। इसे मुख्य रूप से चैरिटेबल आधार पर चलाया जाएगा, जहाँ गरीब और असहाय मरीजों का इलाज नि:शुल्क या बेहद रियायती दरों पर होगा।
क्षमता और लागत
- मरीज भर्ती: प्रारंभिक योजना के अनुसार, यह एक विशाल बेड क्षमता वाला अस्पताल होगा ताकि एक साथ सैकड़ों मरीजों का उपचार हो सके।
- लागत: इस भव्य परियोजना के निर्माण में लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये या उससे अधिक खर्च होने का अनुमान है, जो भक्तों के दान और सहयोग से जुटाया जा रहा है।
स्थान और महत्व
- स्थान: यह अस्पताल गढ़ा गांव (जहाँ बागेश्वर धाम स्थित है) के आसपास या छतरपुर क्षेत्र में ही बनाया जाएगा ताकि धाम आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके।
- मध्य प्रदेश का स्थान: हालांकि मध्य प्रदेश में इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में कैंसर अस्पताल हैं, लेकिन बुंदेलखंड क्षेत्र में इस स्तर का यह पहला अत्याधुनिक चैरिटेबल अस्पताल होगा।
निष्कर्ष---
इस तरह कहा जा सकता है धीरेंद्र शास्त्री वर्तमान में सबसे अधिक प्रसिद्ध कथावाचकों में गिने जाने लगे हैं।और अपने बेबाक बयानों हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना से पूरे विश्व मे प्रसिद्ध हो चुके हैं।धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री आज भारत ही नहीं, विदेशों तक में सनातन धर्म और हिंदू राष्ट्र निर्माण की विचारधारा के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनके दिव्य चमत्कार, सेवा कार्य और बेबाक विचारधारा ने उन्हें वर्तमान समय का एक अद्वितीय आध्यात्मिक नेतृत्वकर्ता बना दिया है।

There is no doubt he is spreading superstitions in youth except the reason and science
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